होली रंगों से पहले अहंकार का अंत का उत्सव है: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
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"सादर जय सियाराम"
🌸होली की शुभकामनाएं🌸
होली की असली कथा बाहर नहीं अपितु भीतर घटित होता है ।
हिरण्यकश्यप कोई व्यक्ति नहीं वह अहंकार है ।
जो चाहता है केवल व केवल उसी की पूजा हों ।
अपितु प्रहलाद भीतर की चेतना है ।
जो सत्य से हटती नहीं है ।
जब विवेक की अग्नि जलती है ।
तो अहंकार जलता है ।
चेतना नहीं जलती ,
वेदांत दृष्टि से देखें तो
"अजो नित्य: शाश्रवतोऽयं पुराणों न हन्यते हनयमाने शरीरे"(भगवद्गीता 2 .20)
अर्थात जो वास्तव में है उसे कोई नष्ट नहीं कर सकते हैं ।
इसलिए होली रंगों से पहले अहंकार का अंत का उत्सव है ।
आपका मार्गदर्शक आपके पूज्य गुरुदेव ,
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
संपर्क सूत्र:-6396372583,
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