भक्ति और प्रेम की भावना को बढ़ावा देना चाहिए: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
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"सादर जय सियाराम"
भक्ति के फल नष्ट कर देता है अहंकार का जहर : आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी
महाराज ।
अहंकार का ज़हर भक्ति के फल को नष्ट कर देता है ।
क्योंकि जब हम अपने आप को बड़ा समझने लगते है ।
और दूसरों को छोटा समझने लगते है ।
तो हमारी भक्ति और प्रेम की भावना खत्म हो जाती है ।
और अहंकार हमें अपने लक्ष्य से भटका देता है ।
और हमें अपने असली उद्देश्य से दूर लें जाता है ।
भक्ति और प्रेम की भावना तभी जीवित रहती है ।
जब हम अपने आप को छोटा समझते हैं ।
और दूसरों को बड़ा समझने हैं ।
इसलिए हमें अपने अहंकार को त्याग कर चाहिए , हमें अपने अहंकार को दूर करने की कोशिश करनी चाहिए और भक्ति और प्रेम की भावना को बढ़ावा देना चाहिए ।
अहंकार की सूक्ष्मता गहरा प्रकाश ,
अंहकार भक्ति का शत्रु है ।
अहंकार वास्तव में भक्ति का शत्रु है ।
क्योंकि यह हमारी आत्मा को अंधकार में ले जाता है ।
और हमें अपने असली स्वरुप से दूर कर देता है ।
जब हम अपने आप को बड़ा समझने लगते है तो हमारी भक्ति और प्रेम की भावना खत्म हो जाती है ।
अहंकार हमें अपने आप में फंसा देता है ।
जबकि भक्ति हमें दूसरों से जुड़ती है ।
और हमें अपने असली स्वरुप को समझने में मदद करती है ।
इसलिए हमें अपने अंदर के अहंकार को दूर करनी चाहिए ।
अहंकार ही अज्ञान है , पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज ने समाज को कड़ा संदेश देते हुए स्पष्ट किया कि अहंकार ही अज्ञान है ।
अहंकार वास्तव में अज्ञान का रुप है ।
अहंकार के कारण ही अपने असली रूप को भूल जाते हैं और अपने आसपास के लोगों को नजरंदाज करने लगते हैं ।
अहंकार हमें यह सोचने पर बाध्य करता है , मजबूर करता है ।
कि हम सबसे बड़े और सबसे अच्छे हैं , लेकिन वास्तव में यह हमारी अज्ञानता का प्रतीक है ।
क्योंकि जब मनुष्य यह सोचने लगता है कि सब कुछ उसके सामर्थ्य से है रहा है तो अंजाने में ईश्वर से वह दूर हो जाता है ।
भगवान अहंकारी का साथ छोड़ देते हैं ।
शरणागत का हाथ थाम लेते हैं ।
आपका मार्गदर्शक आपके पूज्य गुरुदेव ,
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
संपूर्ण विश्व ,
संपर्क सूत्र:-6396372583,
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