ब्यूरो रिपोर्ट भरतसिंह आर ठाकोर अरवल्ली गुजरात 9638076908
*जामनगर का 174 वर्ष पुराना ऐतिहासिक ‘भुजिया कोठा’ अपनी भव्यता के साथ नए रंगरूप में तैयार*
*पर्यटक 19 मार्च से कर सकते हैं दीदार, फेज-2 में खंभालिया गेट, भुजिया कोठा और लाखोटा म्यूजियम को हेरिटेज चेन द्वारा जोड़ा जाएगा*
*गांधीनगर, 18 मार्च :* जामनगर के ऐतिहासिक भूजिया कोठा को 19 मार्च, 2026 से सैलानियों के लिए खोल दिया जाएगा। कभी यह ऐतिहासिक इमारत सौराष्ट्र की सबसे ऊंची इमारत मानी जाती थी, जिसका इस क्षेत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान है।मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास किए गए हैं। वर्ष 2001 में आए विनाशक भूकंप के चलते जामनगर की यह ऐतिहासिक विरासत भी क्षतिग्रस्त हो गई थी। बाद में, जामनगर महानगर पालिका ने स्वर्णिम जयंती मुख्यमंत्री शहरी विकास योजना के तहत 25 करोड़ रुपए के खर्च से भुजिया कोठा के जीर्णोद्धार, संरक्षण, कंसोलिडेशन और री-प्रोडक्शन का काम शुरू किया था।
भुजिया कोठा की विरासत को उसके ऐतिहासिक गौरव के साथ स्थापित करने के लिए इस कार्य को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के साथ समन्वय बनाकर पूरा किया गया और 20 सितंबर, 2025 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इसके फेज-1 का लोकार्पण किया।उल्लेखनीय है कि भुजिया कोठा का निर्माण कार्य 1839 से 1852 के दौरान किया गया था। उस समय इस इमारत का उपयोग सुरक्षा और संचार के लिए किया जाता था। वर्ष 2001 में आए भूकंप से यह इमारत क्षतिग्रस्त हो गई थी। सदियों पुरानी परंपरागत तकनीक के प्रयोग और अथक प्रयासों के जरिए भुजिया कोठा के स्थापत्य, कलात्मक खिड़कियों, झरोखों और रंगमंडप को उसके ऐतिहासिक स्वरूप में लौटाने में सफलता मिली है।यह भव्य इमारत अपने मूल स्वरूप में आकार ले सके, इसलिए जीर्णोद्धार के कार्य में चूने, गुगल, मुल्तानी मिट्टी, गोखरू, अरीठा और सिंदूर जैसी प्राकृतिक सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया है।
*हेरिटेज चेन से जामनगर की विरासत का संरक्षण*
जामनगर की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने के लिए इस कार्य के फेज-2 में खंभालिया गेट, भुजिया कोठा और रणमल तालाब के बीच स्थित लाखोटा म्यूजियम को हेरिटेज चेन के जरिए जोड़ा जा रहा है। निकट भविष्य में इन सभी ऐतिहासिक स्थलों पर एक ही एंट्री पॉइंट से पहुंचा जा सकेगा और इसके लिए कार्य अभी प्रगति पर है।


