संसार में फैली हुई अव्यवस्था से आने के लिए प्रबुद्ध अर्थात एक आदर्श मार्गदर्शक की आवश्यकता होती है: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
ब्यूरो रिपोर्ट TTN 24 NEWS
🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏🌹🌹"सादर जय सियाराम"
🌹"आध्यात्मिक यात्रा"🌹
"हमारी आध्यात्मिक साधना में गुरुदेव की भूमिका"
(गुरु) गु का तात्पर्य है अंधकार और रु का तात्पर्य है जो हमें अंधकार से प्रकाश की तरफ मोड़ दें उसे गुरु कहते हैं ।
गुरु वह होता है जिसने आत्मनियंत्रण की उपलब्धि करने में सर्वव्यापी ब्रह्म के साथ एकरुपता प्राप्त कर लिया है ।
ऐसे गुरुदेव विशेष रूप से अपने शिष्य को पूर्णता की ओर आंतरिक यात्रा में सहायता प्रदान करने में समर्थ होते हैं ।
"एक अंधा दूसरे अंधे रास्ता नहीं दिखा सकता है ।
गुरु और शिष्य संबंध मित्रता की
उच्चतम अभिव्यक्ति है ।
क्योंकि यह नि:शर्त दिव्य प्रेम और बुद्धिमता पर आधारित होता है ।
संसार में फैली हुई अव्यवस्था से आने के लिए प्रबुद्ध अर्थात एक आदर्श मार्गदर्शक की आवश्यकता होती है , उनका अनुसरण केवल एक रास्ता है ।
हमने अपने पूज्य गुरुदेव भगवान के मिलने से पहले कभी भी सच्ची प्रसन्नता और स्वतंत्रता को नहीं पाया , अपने हृदय से ईश्वर को निरंतर पुकारों जब आप ईश्वर को विश्वास दिला देते हैं कि आप केवल ईश्वर के लिए लालायित हैं तो वह आपके पास आपके गुरु को भेजते हैं ।
किसी के जीवन में बहुत से शिक्षक हो सकते हैं ।
पर गुरुदेव केवल व केवल एक ही होता है ।
गुरु शिष्य के संबंध में एक दैवीय नियम परिपूर्ण होता है ।
सच्चा गुरुदेव केवल व केवल ईश्वर द्वारा निर्देशित होता है ।
जो शिष्य अपने पूज्य गुरुदेव भगवान के साथ अपना तादात्म्य स्थापित कर लेते हैं ।
जो शिष्य अपने पूज्य गुरुदेव भगवान के साथ अपना तादात्म्य बिठा लेता है ।
वह शिष्य भगवान से साथ अपना तादात्म्य स्थापित कर लेता है , तादात्म्य का तात्पर्य है कि एकाकार एक वस्तु दूसरे के साथ मिलकर उसी रुप को धारण कर लेता है अभिन्न हो जाता है ।
गुरुदेव शास्त्र सम्मत सत्य की जीवंत मुर्ति होता है , हमारा शिष्य चाहें निम्नतम मानसिक स्तर हो अथवा ज्ञान के उच्चतम स्तर पर ,
"गुरुदेव मैं आपको अनंत काल तक प्रेम करुंगा"
हमारी एक आध्यात्मिक सन्धि हो जाने के पश्चात ही मैं एक शिष्य के लिए एक गुरु का महत्व
पूर्णरुप से समझने लगा हूं ।
जब शिष्य के जीवन में आध्यात्मिक प्रबल होती है ।
तब ईश्वर एक सदगुरू को भेजता है ,गुरुदेव शिष्य में ईश्वर की विद्यमानता को देखता है ।
गुरु और शिष्य के बीच मित्रता शाश्वत होता है ।
गुरु और शिष्य का संबंध प्रेम की सर्वोत्तम अवस्था है ।
मैं तुम्हारा प्रयोग अपने लाभ के लिए नहीं करुंगा मैं केवल व केवल शिष्य के सच्ची प्रसन्नता से प्रसन्न हूं ।
शिष्य मैं कल्पना भी नहीं किया था कि गुरुदेव हमारा इतना हितैषी हों सकते हैं ।
"गुरुदेव एक जागृत ईश्वर है"
गुरुदेव ही सभी मनुष्यों में सर्वोत्तम दाता है ।
गुरुदेव ईश्वर के सामान ही उदार है ।
बल्कि गुरुदेव की उदारता का कोई सीमा नहीं है ।
पुरुषोत्तम भक्तिमार्ग के सच्चे साधक अपनी दृढ़ता तथा स्थिरता द्वारा अपना मोक्ष कर पायेंगे , अपना कल्याण कर पायेंगे ,
ईश्वर ने तुम्हें हमारे पास भेजा है
और मैं तुम्हें पराजित नहीं होने दूंगा....मेरे जाने के पश्चात भी मेरे भक्तों को मेरे शिष्यों को मेरी सहायता मिलती रहेगी ऐसा कभी मत सोचना कि जब मैं यहां से भौतिक रूप से अनुपस्थित हूं ।
मैं आपके साथ नहीं हूं ।
मैं शरीर छोड़ने के बाद भी उतनी ही गहरी से आपके आध्यात्मिक उन्नति के प्रति चिंतित रहुगा जितना मैं अब हूं ।
मैं सदा-सदा आप पर दृष्टि रखूंगा
और जब भी हमारा कोई शिष्य या भक्त अपनी आत्मा की गहराई से मुझे याद करेगा वह जान पायेगा कि मैं उसके निकट हूं ,
आपका मार्गदर्शक आपके पूज्य गुरुदेव ,
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
गुजरात प्रदेश
संपर्क सूत्र:-6396372583,
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