ब्यूरोरिपोर्ट भरतसिंह आर ठाकोर अरवल्ली गुजरात 9638076908
*मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल के करकमलों से इस्कॉन के संस्थापक आचार्य श्रील प्रभुपादजी की गुजराती में प्रकाशित जीवनी ‘विश्वगुरु श्रील प्रभुपाद’ का अनावरण*
*-: मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल :-*
• *आम आदमी जब मुश्किलों में हार जाता है, तब भगवत गीता ही जीवन का सच्चा मार्ग बताती है*
• *श्रील प्रभुपादजी की 150वीं जयंती पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सिक्का तथा पोस्टल स्टाम्प जारी कर प्रभुपादजी के वैश्विक प्रभाव को किया गया सम्मानित*
• *यह पुस्तक गुजरात के युवाओं से लेकर हर पीढ़ी के लिए वरदानस्वरूप सिद्ध होगी*
*अक्षयपात्र द्वारा प्रतिदिन गुजरात के 5 लाख सहित देशभर के 23.5 लाख बच्चों को पष्टिक भोजन परोसा जाता है : हरे कृष्ण मूवमेंट के वाइस चेयरमैन श्री चंचलापति दास*
*गांधीनगर, 23 फरवरी :* भारतीय अध्यात्म एवं वैदिक ज्ञान को विश्व पटल पर गुंजायमान करने वाले अंतरराष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) के संस्थापक आचार्य श्रील प्रभुपादजी के प्रेरणादायी जीवन चरित्र पर गुजराती में प्रकाशित पुस्तक ‘विश्वगुरु श्रील प्रभुपाद’ का भव्य अनावरण समारोह सोमवार को गांधीनगर में आयोजित हुआ। मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल के करकमलों से इस पुस्तक का अनावरण किया गया।यह पुस्तक देश के ‘आध्यात्मिक राजदूत’ श्रील प्रभुपादजी के असाधारण संघर्ष, उनकी वैश्विक आध्यात्मिक यात्रा तथा विश्वभर में भारतीय संस्कृति के प्रसार में उनके अमूल्य योगदान को उजागर करती है।
श्रील प्रभुपादजी के जीवन चरित्र पर आधारित इस पुस्तक के अनावरण अवसर पर अभिनंदन देते हुए मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि श्रील प्रभुपादजी की यात्रा संघर्षों से भरी हुई थी, परंतु श्री कृष्ण पर उनके अटूट विश्वास ने उन्हें अपार सफलता दिलाई। आम आदमी जब मुश्किल में हार जाता है, तब भगवत गीता के संदेश के माध्यम से मिला दृढ़ विश्वास ही जीवन का सच्चा मार्ग बताता है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि श्रील प्रभुपादजी की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सिक्का एवं पोस्टल स्टाम्प जारी कर प्रभुपादजी के वैश्विक प्रभाव को सम्मानित किया गया था।
इस पुस्तक की लेखिका डॉ. उषाबेन उपाध्याय को अभिनंदन देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. उषाबेन ने श्रील प्रभुपादजी के जीवन चरित्र का गुजराती में वर्णन कर राज्य की जनता तक उनके प्रभावशाली विचारों को पहुँचाने का भगीरथ कार्य किया है।
श्रीमद् भगवत गीता में दिए गए संदेश के विषय में वर्णन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्कृष्ट व्यावहारिक जीवन जीने के लिए गीता की महिमा अनिवार्य है। श्री कृष्ण के जीवन प्रसंगों द्वारा समझाया गया कि अधर्म का नाश निश्चित है। हमारे लिए केवल धीरज एवं आंतरिक शांति बनाए रखना जरूरी है। श्री राम के आचरण तथा श्री कृष्ण के वचनों को जीवन में उतार कर मोक्ष की ओर मार्ग सरल बनता है।उन्होंने कहा कि इस्कॉन द्वारा विश्वभर में भौतिकता के पीछे दौड़ने वाले नागरिकों को अध्यात्म की ओर मोड़ने का जो कार्य हुआ है, वह अद्भुत है। विदेशी भक्त जिस प्रकार सर्वस्व त्यागकर कृष्ण भक्ति में लीन होते हैं, वह उनके संपूर्ण समर्पण का प्रमाण है। यह पुस्तक गुजरात के युवाओं से लेकर प्रत्येक पीढ़ी के लिए वरदानस्वरूप सिद्ध होगी। इस प्रकार; मुख्यमंत्री ने श्रील प्रभुपादजी के विरल व्यक्तित्व एवं विश्वभर में कृष्ण भक्ति के प्रसार में उनके योगदान की प्रशंसा की।
ग्लोबल हरे कृष्ण मूवमेंट के को-मेंटोर तथा वाइस चेयरमैन श्री चंचलापति दास ने श्रील प्रभुपादजी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रील प्रभुपाद ने 70 वर्ष की आयु में केवल 40 रुपए के साथ कारगो जहाज में अमेरिका जाकर हरे कृष्ण मंत्र को विश्वव्यापी बनाया। समुद्री यात्रा के दौरान दो बार हृदयाघात सहन करने के बावजूद वे गुरु की आज्ञा का पालन करने में दृढ़ रहे। उनके प्रयासों से ही विश्वभर में 108 से अधिक कृष्ण मंदिरों की स्थापना हुई है।
इस अवसर पर श्री दास ने अक्षयपात्र के सेवायज्ञ कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन तथा अक्षयपात्र फाउंडेशन के संयुक्त प्रयासों का स्मरण किया। प्रधानमंत्री ने गुजरात में वर्ष 2007 में मुख्यमंत्री के रूप में इस्कॉन को गुजरात में सेवा करने के लिए निमंत्रण दिया था और गांधीनगर में एक साधारण शेड में अक्षयपात्र के रसोई घर का उद्घाटन कर अपने करकमलों से बच्चों को भोजन परोसकर इस सेवायज्ञ का प्रारंभ कराया था।श्री चंचलापति दास ने कहा कि आज अक्षयपात्र गुजरात के 5 स्थानों पर प्रतिदिन 5 लाख बच्चों को पौष्टिक भोजन प्रदान करता है। समग्र भारत में यह आँकड़ा 23.5 लाख बच्चों तक पहुँचा है। उन्होने आशा व्यक्त की कि इस पुस्तक द्वारा गुजरात के नागरिक श्रील प्रभुपाद के संघर्षमय जीवन तथा भक्ति मार्ग के अधिक निकट आएंगे।
इस पुस्तक की लेखिका डॉ. उषाबेन उपाध्याय ने कहा कि श्रील प्रभुपाद का जीवन अप्रतिम साहस, धैर्य एवं मानव जाति के प्रति असीम करुणा का जीवंत उदाहरण है। श्रील प्रभुपाद ने 69 वर्ष की वयोवृद्ध आयु में पश्चिम की भौतिकवादी संस्कृति में कृष्ण भक्ति के बीज रोपे थे। उन्होंने केवल धर्म का प्रचार ही नहीं किया, बल्कि व्यसनों में डूबे युवाओं को वैदिक संस्कारों के माध्यम से एक नैतिक समाज की रचना की थी। विश्वभर में 108 मंदिर की स्थापना तथा रूस या अफ्रीका जैसे विषम भौगोलिक वं राजनीतिक क्षेत्रों में भी ‘हरे कृष्ण’ महामंत्र गुजायमान करना उनकी अकल्पनीय उपलब्धि है।
डॉ. उपाध्याय ने कहा कि श्रील प्रभुपाद ने केवल आध्यात्मिक ज्ञान ही नहीं दिया, बल्कि अक्षयपात्र जैसी सेवा द्वारा भूखों को भोजन कराकर मानवता का सच्चा धर्म सिखाया है। आज जब भारत के प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर है, तब श्रील प्रभुपाद ने दशकों पूर्व ही एक ‘आध्यात्मिक राजदूत’ के रूप में भारत की सनातन संस्कृति को विश्वभर में विख्यात किया था।हरे कृष्ण मूवमेंट, अहमदाबाद द्वारा आयोजित इस पुस्तक अनावरण समारोह में शिक्षा मंत्री डॉ. प्रद्युमन वाजा, मुख्य सचिव श्री एम. के. दास, इस्कॉन हरे कृष्ण मंदिर, अहमदाबाद के अध्यक्ष श्री जगन्मोहन कृष्ण दास, साहित्यकार श्री भाग्येश झा सहित विद्वान, शिक्षाविद् तथा महानुभाव बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।



