चौरासी कोसी परिक्रमा यात्रा पर नंगे पैर निकले साधु संतो ने जिला प्रशासन पर जताई नाराजी।
परिक्रमा यात्रा समापन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ से ब्यवस्थाओं की होगी शिकायत।
चन्दगीराम मिश्रा
हरदोई यूपी
बेनीगंज हरदोई 84 कोसी परिक्रमा पर नंगे पैर निकले साधु संतो ने जिला प्रशासन की घोर लापरवाही पर उठाए सवाल नंगे पैर चल रहें संतो को रास्ता पर आई कठिनाइयां यात्रा समापन के बाद मुख्यमंत्री से होगी शिकायत।आपको बताते चलें कि कुछ घंटे बाद नैमिषारण्य से प्रारंभ होने वाली 84 कोसी परिक्रमा हरैया भेरिया नगवां कोथावां गिरधरपुर उमरारी पड़ाव से पांचवे पड़ाव साखिन गोपालपुर के बीच बरौली, गोवर्धनपुर, वाजीदपुर के रास्ते रामादल को सड़क किनारे पूर्व से पड़ी गिट्टी बजरी से होकर गुजरना पड़ेगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरौली से गोवर्धनपुर, वाजीदपुर मुख्य मार्ग का चौड़ीकरण होना था जिसको लेकर सड़क के दोनों ओर गिट्टी बिछाई गई थी जो अब तक पड़ी हुई है। जिसको लेकर नंगे पैर परिक्रमार्थियों को बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन लगातार निरीक्षण करता रहा और दावा करता रहा कि समय रहते सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त हो जाएगी लेकिन व्यवस्थाएं जस की तस आज भी हैं, यही नहीं आज पांचवे पड़ाव पर पहुंचने वाले परिक्रमा का उप जिलाधिकारी सदर सुशील मिश्रा ने निरीक्षण करते हुए बताया कि जनपद का पांचवा पड़ाव घनश्याम नगर से बरौली होते हुए कई गांवो से गुजरेगा जहां पूर्व क्रम को देखते हुए अतिक्रमण हटवा दिया गया है। झाड़ियों को सड़क किनारों को साफ करवा दिया गया है।जो बड़ी समस्या का घर गोपालपुर में थी जिसका समाधान खंड विकास अधिकारी अहिरोरी के द्वारा पहले ही करवा दिया गया है। निरीक्षण के दौरान प्रताप नगर चौराहा सीतापुर मार्ग पर बड़े-बड़े गड्ढे नजर आने पर उन्होंने तुरंत पत्थर गिरवाकर गड्ढों को बंद करवाने के निर्देश दिए। आज परिक्रमार्थी नैमिष में सभी देश-विदेश से आने वाले परिक्रमा में भाग लेने के लिए पहुंचने लगे जो रामादल के साथ सभी पदयात्रा पर निकलेंगे।
जनपद हरदोई में हरैया पहला पड़ाव होगा, दूसरा नगवा कोथावा, तीसरा गिरधरपुर उमरारी, चौथ साखिन गोपालपुर से होकर पुनः सीतापुर जनपद में प्रवेश करेगा। यहां पर यह भी बताना जरूरी है कि विख्यात कथावाचक पीठाधीश्वर श्री अनिल शास्त्री ने कई रथो के साथ पूर्व में परिक्रमा के सभी पड़ाव स्थलों पर रुक कर परिक्रमा को भव्य बनाया था, जहां उनकी यात्रा में सैकड़ो वाहनों का काफिला चल रहा था जो गांव से गुजरने वाले परिक्रमार्थियों के साथ निकलना मुश्किल हो गया। जिस पर उन्होंने दोनों जनपदों के प्रशासन से अतिक्रमण हटाए जाने संबंधी कई बार शिकायत की, थी। जिसका आश्वासन तो मिलता रहा लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। व्यवस्थाएं सही न होने के कारण उन्होंने हिंदुस्तान से बातचीत में बताया कि परिक्रमा करूंगा सभी पड़ाव स्थलों पर जाऊंगा सभी से मिलूंगा सभी की समस्याएं सुनूंगा किसी को किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं होने दूंगा, लेकिन जिस तरह से मैंने पिछले वर्ष परिक्रमा की थी उस प्रकार इस बार परिक्रमा करना हमारे लिए मुश्किल है। 84 कोसी परिक्रमा में दूर-दूर से परिक्रमार्थी भाग लेने आते हैं और अपनी इच्छाएं प्रकट करते हैं साधु संत महात्मा ज्यादातर नंगे पैर पैदल ही यात्राएं करते हैं यह पौराणिक 84 कोसी का बहुत ही देश-विदेश में महत्व माना जाता है सरकार भी भक्तों के लिए पहले से ही सारी तैयारी को दिशा निर्देश जारी कर रखे हैं। पर दूर के ढोल सुहाने ही लगे। उन्होंने कहा संपूर्ण परिक्रमा मेला को अस्थाई की जगह स्थाई कराने के संबंध में वे जल्द ही सूबे के मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे। जिससे रामादल की राह आसान हो सके।
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