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सुरत जिलेके मांडवी तालुका के एकही गांवमे सरकारी अनुदानका लाखों रुपए हजम करने वाले बिंदास्त

 ब्यूरोचीफ शैलेन्द्रसिंह बारडोली गुजरात 


सुरत जिलेके मांडवी तालुका के एकही गांवमे सरकारी अनुदानका लाखों रुपए हजम करने वाले बिंदास्त।

मांडवी तालुका के अमलसाडी गांव से सरकारी रिकॉर्ड में भ्रष्टाचार का एक और घोटाला सामने आया।


मांडवी तालुका पंचायत ने पृथक्करण शेड के लिए पांच लाख रुपये का अनुदान दियागयाथा जगह पर काम 30 हजारका खर्चाभी नहीं!!


अमलसाडी गांव के सरपंच और संबंधित अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया होनेका फर्जी दावा करके लाखों रुपए सरकारकी तिजोरी से खागया।



सूरत जिले के मांडवी तालुका में किसी भी सरकारी कार्यालय में अधिकारी के रूप में काम करें और कुछ ही समय में अमीर बन जाएं। 


यह किसी एक व्यक्ति की गलती नहीं है। सरकारी रिकॉर्ड और मौके पर किए गए कार्य ही एकमात्र सबूत हैं। 


इतना बड़ा भ्रष्टाचार करने वाले व्यक्ति का सीना 56 इंच का होना जरूरी नहीं है। अगर 40 इंच के सीने वाले अधिकारियों द्वारा लाखों सरकारी अनुदानों को हड़पने के कथित घोटाले एक ही जगह से सामने आ रहे हैं।

तब जनता का विकास संभव नहीं होगा। अगले 50 वर्षों में भी मांडवी तालुका का हर गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित नजर आएगा।


अमलसादी गांव में, तालुका पंचायत ने 9/3/23 को एसबीएमजी पृथक्करण शेड के लिए वर्ष 2022-23 का आदेश दिया था, जिसे प्राधिकरण द्वारा 4/10/22 को तकनीकी अनुमोदन संख्या 1388 के साथ एटीवी मांडवी के उप कार्यकारी अभियंता को जारी किया गया था। 


स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत स्वीकृत 4,90,350 रुपये के अनुदान से पृथक्करण शेड का काम 11/3/23 को शुरू हुआ। सरकारी अनुदान से 4,90,350 रुपये खर्च करके केवल 5 से 6 पटरे काशेड बनाए गए और दोनों तरफ की नालियों के बीच केवल 5 फीट का सपोर्ट दिया गया। सवाल यह उठता है कि जब 20/3/23 को सरकारी अनुदान से कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र दिया गया, तो सक्षम अधिकारी के रूप में एसबीएमजी तालुका पंचायत के ब्लॉक समन्वयक ने मौकेका फर्जी निरीक्षण किया बतायाथा।

 

और सक्षम अधिकारी के रूप में एसबीएमजी के सिविल इंजीनियर और उप कार्यकारी अभियंता ने क्या किया? आज भी, स्थल पर निर्मित शेड का जिला स्तर पर निरीक्षण किया जायेतो स्थानों पर बिछाई गए पटरे अच्छी गुणवत्ता की नहींहैं। इनमें आईएसआई कंपनी का माल इस्तेमाल किया जाए तोभी साइट पर 30,000 रुपये का भी काम नहीं होता। 


उस समय गांव के लोगको उल्लू बनाके बड़ा भ्रष्टाचार कांड किया गया है। 


अफसरोंने मिलके नई सरकार के खजाने में लाखों रुपये का गबन कियाहै। 


सरपंच ने सरकारी अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके इतना कुछ किया कि लाखों रुपये के गबन घोटाले के सरकारी रिकॉर्ड पर सामने आने के बावजूद जिला अधिकारियों के बहरेपन के कारण गांव वालों की आवाज अनसुनी कर दी गई।


अभी देखना यहीहै की 5 से 6 पतरेका शेड बनाकर पांचलाख सरकारी तिजोरीमे लुट मचाने वालोकी जांच कब ओर कौन करेगा तब कियागया तत्कालीन तलाटी, सरपंच ओर अफसरोके काले भ्रष्टाचारके कारनामे बाहर आए।

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