ब्यूरो रिपोर्ट भरतसिंह आर ठाकोर अरवल्ली गुजरात 9638076908
*सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री जस्टिस सूर्यकांत और गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल ने गुजरात हाई कोर्ट के नए स्टेट-ऑफ-द-आर्ट आर्बिट्रेशन सेंटर के भवन की आधारशिला रखी*
*गुजरात हाई कोर्ट में ‘संस्थागत मध्यस्थता की चुनौतियां और भावी दिशा’ विषय पर दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस का प्रारंभ*
*राज्य सरकार ‘सभी के लिए न्याय, समय पर न्याय’ के दृष्टिकोण के साथ न्यायिक ढांचागत सुविधाओं को मजबूत बनाने को कटिबद्ध : मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल*
*मध्यस्थता के क्षेत्र में नवीन सुविधाओं से भारत की मध्यस्थता व्यवस्था और भी सक्षम, विश्वसनीय और आधुनिक बनेगी : मुख्य न्यायमूर्ति श्री जस्टिस सूर्यकांत*
*सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति सर्वश्री जस्टिस अरविंद कुमार, जस्टिस एन.वी. अंजारिया, जस्टिस विपुल पंचोली, गुजरात के उप मुख्यमंत्री श्री हर्ष संघवी, हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश श्रीमती सुनीता अग्रवाल सहित न्यायमूर्तियों की प्रोत्साहक उपस्थिति*
*आर्बिट्रेशन सेंटर के लोगो, री-डिजाइन की गई नई वेबसाइट और न्यूजलेटर का विमोचन*
*गांधीनगर, 28 फरवरी :* सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत और मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल ने शनिवार को अहमदाबाद में गुजरात हाई कोर्ट आर्बिट्रेशन सेंटर (मध्यस्थता केंद्र) के नए अत्याधुनिक भवन की आधारशिला रखी, और सेंटर के लोगो का अनावरण भी किया।इसके साथ ही, गुजरात हाई कोर्ट सभागार में ‘इंस्टीट्यूशनल आर्बिट्रेशन एट अ क्रॉसरोड्स : चैलेंजेस एंड द वे फॉरवर्ड’ विषय पर एक महत्वपूर्ण कॉन्फ्रेंस का भी प्रारंभ किया गया। इस अवसर पर मध्यस्थता केंद्र के न्यूजलेटर का विमोचन और केंद्र की री-डिजाइन की गई नई वेबसाइट को भी लॉन्च किया गया।
इस कार्यक्रम का आयोजन गुजरात हाई कोर्ट मध्यस्थता केंद्र और गुजरात राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान तथा गुजरात हाई कोर्ट के मार्गदर्शन में किया गया।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) माननीय श्री सूर्यकांत ने अपने संबोधन में कहा कि गुजरात हाई कोर्ट मध्यस्थता केंद्र के नए अत्याधुनिक भवन का शिलान्यास और संस्थागत मध्यस्थता के भविष्य पर आयोजित हो रही कॉन्फ्रेंस देश के विवाद समाधान ढांचे को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।
उन्होंने बलपूर्वक कहा कि भौतिक बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) केवल एक प्रशासनिक सुविधा नहीं है, बल्कि यह संस्था की गंभीरता और विश्वसनीयता का संकेत है। जब कोई अंतरराष्ट्रीय निवेशक या पक्षकार पेशेवर एवं सुविधाजनक मध्यस्थता केंद्र में प्रवेश करता है, तो उसे यह भरोसा होता है कि उसके विवाद का उचित एवं तटस्थ निराकरण होगा।मुख्य न्यायमूर्ति ने आगे कहा कि गुजरात औद्योगिक विकास और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में देश में अग्रणी है, तब विदेशी निवेशकों के लिए परंपरागत कानूनी प्रक्रिया की तुलना में संस्थागत मध्यस्थता अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
उन्होंने इस क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों के बारे में स्पष्टता करते हुए कहा कि हमें केवल कागज पर दिए गए नियमों से ही नहीं, अपितु पारदर्शी और न्यायी प्रक्रिया के माध्यम से पक्षकारों का भरोसा जीतना होगा। भारत को मध्यस्थों की गुणवत्ता और प्रशिक्षण में निवेश करने की जरूरत है, ताकि भारत वैश्विक स्तर के मध्यस्थता केंद्र के तौर पर उभर सके। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, नई वेबसाइट और न्यूजलेटर की लॉन्चिंग की सराहना करते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि इन नई सुविधाओं से भारत की मध्यस्थता प्रणाली और भी सक्षम, विश्वसनीय एवं आधुनिक बनेगी।
*मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल*
मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल ने इस अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश को ‘ग्लोबल आर्बिट्रेशन हब’ यानी वैश्विक मध्यस्थता का हब बनाने के संकल्प के साथ न्याय प्रक्रिया में अनेक सुधार किए जा रहे हैं, जिसमें आज गुजरात के न्याय तंत्र के लिए एक नया ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है।
भारत में मध्यस्थता की परंपरा के सदियों पुरानी होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक आर्बिट्रेशन यानी मध्यस्थता की जड़ें उपनिषदों में वर्णित मध्यस्थता संस्थाओं और पंचायत प्रणाली की ‘पंच परमेश्वर’ की भावना से ही जुड़ी हैं।पूज्य महात्मा गांधी जी के उदाहरण के साथ उन्होंने कहा कि एक वकील का वास्तविक कार्य दो विभाजित पक्षों को एक करना है और यह विचारधारा वर्तमान मध्यस्थता प्रणाली का हार्द है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राज्य सरकार ‘सभी के लिए न्याय, समय पर न्याय’ के दृष्टिकोण के साथ न्यायिक ढांचागत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए कटिबद्ध है। हाल ही में पेश किए गए राज्य सरकार के बजट में इस उद्देश्य से विधि विभाग के लिए 2700 करोड़ रुपए से अधिक की बड़ी राशि का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि गुजरात व्यापार और उद्योग क्षेत्र में वैश्विक निवेश का एक अग्रणी राज्य होने के कारण त्वरित विवाद निवारण के लिए मध्यस्थता जैसी प्रणाली ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ यानी कारोबार करने की सुगमता को मजबूत आधार देगी।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यहां आकार लेने वाली स्टेट-ऑफ-द-आर्ट इमारत और लॉन्च की गई नई वेबसाइट मध्यस्थता प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाएगी और यह 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का आधार सिद्ध होगी।
इस कार्यक्रम के मेजबान के रूप में गुजरात हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश श्रीमती सुनीता अग्रवाल ने स्वागत भाषण में सभी का स्वागत-सत्कार किया। उन्होंने यहां निर्मित होने वाले स्टेट-ऑफ-द-आर्ट आर्बिट्रेशन सेंटर के बारे में, उसमें उपलब्ध होने वाली सुविधाओं, सेंटर की आवश्यकता तथा उसके निर्माण एवं सेंटर की री-डिजाइन की गई नई वेबसाइट सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जस्टिस श्री अरविंद कुमार, जस्टिस श्री एन.वी. अंजारिया और जस्टिस श्री विपुल एम. पंचोली की गरिमामयी उपस्थिति रही। इसके अलावा, गुजरात के उप मुख्यमंत्री श्री हर्ष संघवी भी इस मौके पर मौजूद रहे। गुजरात हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति और गुजरात हाई कोर्ट आर्बिट्रेशन सेंटर (जीएचएसी) के अध्यक्ष तथा गुजरात राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (जीएसएलएसए) के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए.वाई. कोगजे, गुजरात हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति और बिल्डिंग कमेटी के चेयरपर्सन न्यायमूर्ति श्री ए.एस. सुपेहिया, राज्य के महाधिवक्ता श्री कमल त्रिवेदी सहित गुजरात हाईकोर्ट के अन्य न्यायमूर्ति उपस्थित रहे।


