लोकेशन बोकारो से नेशनल ब्यूरो हेड और लीगल एडवाइजर अधिवक्ता राजेश कुमार की विशेष रिपोर्ट।
एंकर। बोकारो में महिलाओं का लगातार लापता होना: क्या यह दिल्ली की 'लापतागंज' बनता जा रहा है? पुलिस और प्रशासन पर सवालिया निशान
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 2026 के पहले 15 दिनों (1 से 15 जनवरी) में ही 807 लोग लापता हुए, जिनमें से 509 महिलाएं और लड़कियां थीं। यह औसतन प्रतिदिन लगभग 54 गुमशुदगी की सूचना है। 2025 में तो कुल 24,500 से अधिक लापता मामले दर्ज हुए, जिनमें 60% से ज्यादा महिलाएं थीं। कई मामले अनसुलझे रह जाते हैं, और सुरक्षा की स्थिति पर सवाल खड़े होते हैं।अब झारखंड के औद्योगिक शहर बोकारो में भी यही चिंता बढ़ रही है। हालिया घटनाएं पुलिस व्यवस्था, SP, DM और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठा रही हैं।
हालिया घटनाएं और चिंता
4 फरवरी 2026: बोकारो के सेक्टर-12C से सुबह 10:30 बजे एक महिला लापता हो गई। परिवार और स्थानीय लोगों ने सोशल मीडिया पर अपील की कि कोई जानकारी हो तो बताएं। अभी तक कोई ठोस अपडेट नहीं, खोज जारी
जनवरी 20, 2026: बोकारो स्टील सिटी, सेक्टर-2A की 55 वर्षीय नमिता देवी (क्वार्टर 1-002) सुबह की सैर के लिए निकलीं और लापता हो गईं। 13-14 दिनों बाद 2 फरवरी को चंदनकियारी (इंद्रटांड) के पास झाड़ियों में उनका अर्धनग्न, आंशिक रूप से जला हुआ शव मिला। SP हरविंदर सिंह ने प्रारंभिक जांच में दुष्कर्म के बाद हत्या की आशंका जताई। शव की पहचान बेटे ने दांतों और चूड़ियों से की
जनवरी 30, 2026: सेक्टर-6 थाना क्षेत्र के बोकारो स्टील सिटी कॉलेज के पास झाड़ियों में एक अज्ञात अधेड़ महिला का शव मिला, जिसका सिर कुचला हुआ था। हत्या का शक, पहचान अभी नहीं हुई। पुलिस आसपास के लापता मामलों से मिलान कर रही है
ये मामले अलग-अलग हैं, लेकिन पैटर्न एक जैसा: महिलाएं लापता, देर से शव बरामद, अक्सर यौन शोषण/हत्या के संकेत। परिवारों का दर्द, समाज में दहशत।
पुलिस और प्रशासन पर सवाल
बोकारो पुलिस के अधीक्षक (SP हरविंदर सिंह) और जिला अधिकारी (DM) बोकारो की माई-बाप माने जाते हैं। उनके कार्यकाल में ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं तो सवाल स्वाभाविक है:
क्या पुलिस निगरानी कमजोर है? CCTV, पेट्रोलिंग, महिला सुरक्षा यूनिट पर्याप्त नहीं?
लापता शिकायत पर तुरंत एक्शन क्यों नहीं? कई मामलों में देरी से शव मिलता है।
क्या कोई संगठित गिरोह सक्रिय है जो पुलिस पकड़ नहीं पा रही? या पुलिस की क्षमता/इरादे में कमी?
जिला प्रशासन, स्थानीय विधायक/सांसद क्या कर रहे? क्या जनता को भगवान के भरोसे छोड़ दिया गया है?
बोकारो स्टील सिटी जैसे औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षा सख्त होनी चाहिए, लेकिन वास्तविकता अलग है। आम जनता, खासकर महिलाएं और बच्चियां सुरक्षित महसूस नहीं कर रही। लापता होने पर परिवार परेशान, अक्सर अंतिम संस्कार तक का इंतजार।
क्यों हो रहा है यह सब?
शहरीकरण, प्रवासी मजदूर, औद्योगिक गतिविधि → भीड़भाड़, अपराध के मौके।
पुलिस संसाधनों की कमी, ओवरबर्डन, देरी वाली जांच।
जागरूकता/सुरक्षा उपायों का अभाव (महिलाओं के लिए हेल्पलाइन, सेल्फ डिफेंस, फास्ट ट्रैक कोर्ट)।
कई लापता मामले परिवारिक/एलोपमेंट के होते हैं, लेकिन गंभीर अपराधी मामले (जैसे नमिता देवी) सुरक्षा विफलता दर्शाते हैं।
दिल्ली जैसी स्थिति से बचने के लिए बोकारो पुलिस को तत्काल कदम उठाने चाहिए:
सभी लापता मामलों पर तुरंत FIR, CCTV फुटेज चेक, डिजिटल ट्रैकिंग।
महिला सुरक्षा यूनिट को मजबूत करें, हॉटस्पॉट पर CCTV/पेट्रोलिंग बढ़ाएं।
SP/DM स्तर पर समीक्षा बैठक, गिरोहों पर विशेष अभियान।
जनता से सहयोग: सतर्क रहें, संदिग्ध गतिविधि रिपोर्ट करें।
दोषियों पर सख्त कार्रवाई, त्वरित न्याय।
बोकारो के लोगों को अब चुप नहीं रहना चाहिए। सोशल मीडिया, RTI, स्थानीय प्रतिनिधियों पर दबाव बनाएं। महिलाओं की सुरक्षा हर किसी की जिम्मेदारी है। अगर प्रशासन नहीं जागा तो बोकारो सचमुच दिल्ली की तरह 'लापतागंज' बन सकता है।
