लोकेशन बोकारो से नेशनल ब्यूरो हेड एवं लीगल एडवाइजर अधिवक्ता राजेश कुमार की विशेष रिपोर्ट।
एंकर। बोकारो में इंसान की कीमत कम और हेलमेट चालान पर फोकस, ज्यादा लेकिन महिलाओं-बच्चों की सुरक्षा कहा
बोकारो (झारखंड) के एसपी साहब और डीसी साहब, "इंसान की कीमत आप क्या जाने..." – यह डायलॉग हाल की घटनाओं को देखते हुए बिलकुल सटीक लगता है। हाल के दिनों में बोकारो स्टील सिटी में कई गंभीर वारदातें हुई हैं, लेकिन प्रशासन और पुलिस का ज्यादा ध्यान दो पहिया वाहन चालकों के बिना हेलमेट चलान काटने पर रहता है। जबकि हत्या, बलात्कार की आशंका वाली घटनाएँ, लापता महिलाएँ और बच्चे का अपहरण का प्रयास जैसे मामले पुलिस की प्राथमिकता में कम दिखते हैं।हाल की प्रमुख घटनाएँ जो चिंता बढ़ा रही हैं
सेक्टर-2A से 55 वर्षीय नमिता देवी की लापता होना और शव बरामदगी
बोकारो स्टील सिटी थाना क्षेत्र के सेक्टर-2A, क्वार्टर नंबर 1-002 की निवासी नमिता देवी (55 वर्ष) 20 जनवरी 2026 को सुबह मॉर्निंग वॉक के लिए निकलीं और लापता हो गईं। परिवार ने तुरंत सनहा दर्ज कराई। 13 दिनों बाद 2 फरवरी 2026 को चंदनकियारी थाना क्षेत्र के इंद्रटांड जंगल में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पास उनका अर्धजला और अर्धनग्न शव मिला। शव की पहचान पुत्र अमर गोप ने की। एसपी हरविंदर सिंह ने मौका-मुआयना किया, डॉग स्क्वॉड और क्राइम ब्रांच को लगाया गया। प्रारंभिक जांच में बलात्कार व हत्या की आशंका जताई जा रही है; पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है।
बीएस सिटी कॉलेज के पास अज्ञात ~40 वर्षीय महिला का शव:
सेक्टर-6 थाना क्षेत्र में बीएस सिटी कॉलेज के पास झाड़ियों में एक अज्ञात महिला (लगभग 40 वर्ष) का अर्धनग्न शव मिला। सुबह मॉर्निंग वॉक करने वालों ने सूचना दी। शव का चेहरा/सिर पत्थर से कुचला हुआ था, दुष्कर्म के बाद हत्या की आशंका। थाना प्रभारी संगीता कुमारी, बीएस सिटी थाना प्रभारी और एसपी हरविंदर सिंह मौके पर पहुंचे। डॉग स्क्वॉड, फॉरेंसिक टीम लगाई गई, बायोमेट्रिक/पोस्टर से पहचान की कोशिश जारी। अभी तक कोई गिरफ्तारी या सुराग नहीं। इलाके में सनसनी और दहशत है।
सेक्टर-12 में बच्ची का अपहरण प्रयास:
हाल के दिनों में सेक्टर-12 थाना क्षेत्र के आदर्श कोऑपरेटिव में काली गाड़ी Thar सवार लोगों ने छोटी बच्चियों को चॉकलेट/टॉफी का लालच देकर बहलाने और जबरन ले जाने की कोशिश की। बच्चियों ने साहस दिखाते हुए नाखूनों से हमला कर खुद को बचाया। परिवारों में डर का माहौल है, लेकिन पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।
पुरानी घटना (कुछ महीने/वर्ष पहले):
एक बुजुर्ग व्यक्ति बिना हेलमेट स्कूटी से जा रहे थे। पुलिस देखकर भागे, ट्रैक्टर से टक्कर में मौत हो गई। ऐसी घटनाएँ लोगों में पुलिस से बचने का डर पैदा करती हैं।
ट्रैफिक चालान vs गंभीर अपराध – जनता का गुस्सा
बोकारो के हर चौराहे, मोड़ पर पुलिस दो पहिया वाहनों (खासकर बिना हेलमेट) के चालान काटने में व्यस्त दिखती है। कई लोग कहते हैं कि यह "जेब भरने" का आसान तरीका है, जबकि रात में गश्त कम, चोरी-वारदात, महिलाओं की सुरक्षा पर ध्यान कम। जामशेदपुर जैसे पड़ोसी इलाकों में भी इसी तरह की शिकायतें रही हैं कि अपराधियों पर फोकस कम, हेलमेट/डॉक्यूमेंट चेकिंग ज्यादा।46a380
बोकारो पुलिस का दावा है कि वे अपराध मुक्त रखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हाल की घटनाएँ (लापता महिला 13 दिन बाद शव, अज्ञात शव, अपहरण प्रयास) तेज जांच की मांग कर रही हैं। एसपी हरविंदर सिंह ने इन मामलों में मौका-मुआयना किया है, लेकिन जनता पूछ रही है:
रात के गश्त/पहाड़ी इलाकों में ज्यादा पुलिस क्यों नहीं?
महिलाओं-लड़कियों के लिए विशेष सुरक्षा (CCTV, हेल्पलाइन, पेट्रोलिंग) क्यों कम?
अपहरण/हत्या के मामलों में तेज गिरफ्तारी क्यों नहीं?
क्या हेलमेट चालान से राजस्व प्राथमिकता है, जबकि इंसान की जान दो पैसे की लगती है?
क्या किया जा सकता है? सुझाव
महिलाओं-बच्चों की सुरक्षा: रात में विशेष महिला पुलिस पेट्रोलिंग, सेक्टर-वाइज CCTV अपग्रेड, स्कूल/रिहायशी इलाकों में जागरूकता।
जांच तेज: लापता मामलों में तुरंत डॉग स्क्वॉड, फॉरेंसिक, CCTV चेक।
संतुलित ट्रैफिक एनफोर्समेंट: हेलमेट जरूरी है (सुरक्षा के लिए), लेकिन इसे कमाई का साधन न बनाएँ। जागरूकता + सख्ती दोनों।
जनता-पुलिस सहयोग गंभीर शिकायतों पर तुरंत एक्शन।
बोकारो एक औद्योगिक शहर है, सुरक्षा यहाँ जरूरी है। हाल की घटनाएँ (नमिता देवी, कॉलेज के पास शव, सेक्टर-12 अपहरण प्रयास) सिस्टम की सुस्ती या प्राथमिकता की कमी दिखाती हैं। एसपी साहब और डीसी साहब, अपराध रोकने में उतनी ही फुर्ती दिखाएँ जितनी चालान काटने में। महिलाएँ-लड़कियाँ सुरक्षित महसूस करें, यही असली सफलता है।
