आनन्द बॉबी चावला ब्यूरो चीफ झांसी।
दिनांक : 14 फरवरी 2026
देश विरोधी एवं किसान विरोधी मोदी - ट्रंप डील के विरोध में आम आदमी पार्टी का विरोध प्रदर्शन।
एपस्टीन फाइल को दबाना एवं अडानी को बचाना डील का संभावित मकसद।
झांसी।आम आदमी पार्टी, उत्तर प्रदेश की ओर से आज एक प्रदेश व्यापी विरोध प्रदर्शन किया गया जिसके अंतर्गत झांसी कलेक्ट्रेट में पार्टी कार्यकर्ताओं ने मोदी - ट्रंप ट्रेड डील का विरोध कर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने विरोध स्वरूप डील के मसौदे की प्रतियां जलाकर विरोध जताया तथा कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ की गई ट्रेड डील को लेकर देशभर में गहरी चिंता और व्यापक आशंकाएँ व्याप्त हैं। इस ट्रेड डील की शर्तों, संभावित लाभार्थियों और दूरगामी प्रभावों को लेकर न तो संसद को विश्वास में लिया गया है और न ही देश की जनता के समक्ष पूर्ण पारदर्शिता बरती गई है।
देश यह भी भूला नहीं है कि राफेल सौदे के दौरान अनिल अंबानी की महज़ 12 दिन पुरानी कंपनी को ऑफसेट पार्टनर बनाए जाने को लेकर व्यापक सार्वजनिक बहस और गंभीर प्रश्न उठे थे। उस समय भी यह आरोप लगा था कि सरकारी नीतिगत निर्णयों से चुनिंदा कॉरपोरेट समूहों को लाभ पहुंचाया गया। आज जब मोदी-ट्रंप ट्रेड डील सामने आई है, तो यह आवश्यक है कि यह स्पष्ट किया जाए कि कहीं यह डील भी किसी विशेष उद्योग समूह को लाभ पहुंचाने की मंशा से तो नहीं की गई।
मोदी सरकार पर आरोप है कि उसने देश के करोड़ों किसानों के हितों को अमेरिका के सामने गिरवी रख दिया है, क्योंकि इस समझौते के तहत अमेरिका भारतीय उत्पादों पर 18 प्रतिशत टैक्स लगाएगा जबकि भारत अमेरिकी उत्पादों पर 0 जीरो प्रतिशत टैक्स वसूलेगा, और सबसे गंभीर बात यह है कि भारत का कृषि बाजार अमेरिकी किसानों के लिए खोल दिया गया है, जिन्हें वहां लगभग 80 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिलती है; ऐसे में भारतीय किसान ऐसी किसी सब्सिडी के अभाव में उनसे कैसे प्रतिस्पर्धा करेगा—यह सवाल खड़ा होता है। आलोचकों का कहना है कि इस डील में कुछ चुनिंदा वस्तुओं के साथ “और अन्य उत्पाद” जैसे शब्द जोड़कर भविष्य में और अधिक क्षेत्रों को खोलने की गुंजाइश रखी गई है, जिससे देश की आर्थिक सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा दोनों पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
किसानों, एमएसएमई, छोटे व्यापारियों, युवाओं और मध्यम वर्ग पर इस ट्रेड डील का क्या प्रभाव पड़ेगा — इस पर कोई विस्तृत श्वेत पत्र या संसदीय चर्चा अब तक सामने नहीं आई है। यदि यह डील भारतीय बाजार को असंतुलित तरीके से विदेशी हितों के लिए खोलती है, तो इसका सीधा दुष्प्रभाव कृषि, रोजगार और स्थानीय उद्योगों पर पड़ेगा। यह केवल आर्थिक समझौता नहीं बल्कि देश की आत्मनिर्भरता और कृषि संरचना पर सीधा प्रहार है। इससे छोटे किसानों की आय पर असर पड़ेगा, स्थानीय बाजार विदेशी कंपनियों के लिए खोले जाएंगे और आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ेगा।विरोध प्रदर्शन एवं ज्ञापन के माध्यम से कार्यकर्ताओं ने महामहिम राष्ट्रपति महोदया से मांग की कि वे संविधान प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए देश विरोधी मोदी-ट्रंप ट्रेड डील को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने हेतु केंद्र सरकार को निर्देशित करें जिससे देश के करोड़ों किसानों एवं देश के हितों की रक्षा हो सके एवं जनता के मन में उत्पन्न आशंकाओं का समुचित समाधान हो सके।
महानगर अध्यक्ष ग्यादीन कुशवाहा, प्रांतीय सचिव पुत्तू सिंह कुशवाहा, किसान प्रकोष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष चौधरी परवेज, जिला महासचिव आशीष तिवारी, के एस करिअप्पा, जिला सचिव अब्दुल रहमान, प्रदेश सचिव भवजीत सिंह सरना, सतीश राय, वरिष्ठ नेता साजिद सिद्दीकी, पूर्व जिलाध्यक्ष कैलाश कुशवाहा, महानगर महासचिव नीलम चौधरी, जिला उपाध्यक्ष तुलसीदास कुशवाहा आदि उपस्थित रहे ।
कैमरामैन शिवम् के साथ आनन्द बॉबी चावला झांसी।


