ब्यूरो चीफ शैलेन्द्रसिंह बारडोली गुजरात
मांडवी के तालुका विकाश अधिकारी को कथित तौर पर अमलसाडी गांव पंचायतमे हुआ लाखों रुपयेका घोटाले की जांच के लिए और कितने सबूतों की जरूरत है?
मांडवी के टीडीओ के साथ मोबाइल पर हुई बातचीत से मिले जवाब बहुत कुछ बयां करते हैं।जब पंचायत स्वयं अभिलेखों के माध्यम से सरपंच तलाटी के कृत्यों का पर्दाफाश कर रही है, तो जांच में देरी क्यों हो रही है?
कौन सा राजनीतिक नेताके इशारे पर तथ्य की जांच करने से डर लगाता है कि अतीत में फर्जी बिलों के माध्यम से 15वें वित्त आयोग के लाखों रुपये बर्बाद कर दिए गए थे?
तालुका के एक जिम्मेदार अधिकारी के रूप में, क्या लोगों की शिकायतों को सुनना ही काफी है?ओर कोई जिम्मेवारी नहीं ?
अमलसाडी गांव के तत्कालीन तलाटी द्वारा 8,70,975 लाख रुपये के कथित भ्रष्टाचार की जांच करने आजतक आगे क्यू नहीं आए?
मांडवी के जिम्मेवार टीडीओ ग्राम सभा में भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने वाले व्यक्ति पर हुए जानलेवा हमले के शिकायतकर्ता को तीन महीने के बादभी हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई आजतक क्यूंनहीं की?
तलाती महोदय अंकुर सवालियाने जो अमलसादी गांव में विभिन्न विकास कार्यों के लिए 15वें वित्त आयोग की ग्रामीण विकास एजेंसी द्वारा आवंटित लाखों रुपये के प्राप्तकर्ता बन गए हैं, टीडीओ महोदय के समक्ष फर्जी बिलों को सरकारी अभिलेखों के साथ खुलेआम रखकर लाखों रुपये के गबन के और कितने सबूत पेश करने होंगे?
पंचायत पुस्तिका में सरकार ने कोली पटेल फलिया में पेवर ब्लॉकों की लागत को 15वें वित्तीय वर्ष 2024-25 में विकास कार्यों के लिए स्वीकृत 17,94,740 रुपये की राशि में से दर्शाया है। पटेल फलिया में पिछले समय में विधायक अनुदान और नई सड़कों की सहायता से 3,92,100 रुपये के विकास कार्य किए जा चुके हैं, जिन्हें पंचायत की संकल्प पुस्तिका में सर्वसम्मति से पारित किया गया है।
यदि कार्य स्वीकृत नहीं था, तो किस प्राधिकरण द्वारा कार्य संपन्न कराए गए थे? लेखापरीक्षा में तलाटी महाशय अंकुर सवलिया ने 8,70,975 लाख रुपये के दो कार्य दिखाए। उन्होंने किन एजेंसियों से कार्य करवाए और रिकॉर्ड में बिल दिखाकर लेखापरीक्षा को स्वीकृत कराया?
इतने बड़े घोटाले को अंजाम देने के बावजूद, इतने महीने बीत जाने के बाद भी इस गंभीर घोटाले की कोई जांच या कार्रवाई क्यों नहीं की गई है?
एक तालुका के जिम्मेदार अधिकारी के रूप में टेलीफोन पर हुई बातचीत में आपका यह जवाब कितना उचित है कि जांच जारी है, जबकि गांव के नागरिक विजय भाई ने 30/10/25 को आपको ग्राम सभा में भ्रष्टाचार के लिखित सबूत प्रस्तुत किए और मामले को दबाने के इरादे से, शिकायत के तीन महीने बाद भी आप यही दोहराते रहे कि जांच जारी है, जिसके कारण पूरी ग्राम सभा में दंगा भड़क गयाथा क्या लोकतंत्र में गांव के नागरिक को भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने का संविधान के अधिकार नहीं है?
आंगबीर मामले में जिला कलेक्टर द्वारा न्यायिक रिकॉर्ड जांच कानूनी तौरपर करवाया जाए तब अमलसाड़ी गंवामे तलाटी ओर सरपंच केसाथ सरकार सहायके लाखों रुपयोंका घोटाला करने वालों की एक लंबी सूची सामने आने की पक्की संभावना है!
