भूमि विवादों के निपटारे के लिए बिहार सरकार का बड़ा फैसला,अब 3 महीने में होगा समाधान,‘लंबित’ की परिभाषा बदली
मुकेश कुमार-स्टेट हेड-बिहार/झारखंड
पटना(बिहार)।बिहार में भूमि विवादों के अंतहीन सिलसिले को खत्म करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। विभाग ने अब 'लंबित' (Pending)मामलों की परिभाषा स्पष्ट कर दी है, जिससे अधिकारियों के लिए टालमटोल करना मुश्किल होगा।अब केवल उन्हीं मामलों को 'लंबित' माना जाएगा जिनमें किसी सक्षम न्यायालय का स्टे ऑर्डर(Stay Order)प्रभावी होगा।तीन महीने की समय सीमा तय
विभाग के प्रधान सचिव सी.के.अनिल ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों,डीएम और भूमि सुधार उप समाहर्ताओं(DCLR)को कड़े निर्देश जारी किए हैं।नए आदेश के मुताबिक,बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम,2009 के तहत आने वाले सभी वादों का निष्पादन अधिकतम तीन माह के भीतर करना अनिवार्य होगा।समाहर्ताओं (DM)को निर्देशित किया गया है कि वे साप्ताहिक समीक्षा बैठक कर इन मामलों की प्रगति की निगरानी करें।
ईज़ ऑफ लिविंग पर जोर
उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि यह पहल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 'सात निश्चय कार्यक्रम(2025-30)' के तहत 'ईज़ ऑफ लिविंग' के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।उन्होंने जोर देकर कहा कि सामाजिक स्थिरता के लिए भूमि विवादों का त्वरित समाधान आवश्यक है।
अधिकारियों के लिए मुख्य निर्देश:
संक्षिप्त प्रक्रिया(Summary Disposal):
मामलों को लंबी कानूनी प्रक्रियाओं में उलझाने के बजाय संक्षिप्त प्रक्रिया के तहत निपटाया जाए।
स्टे ऑर्डर का पेंच:
यदि किसी मामले में सिविल प्रक्रिया संहिता,1908 के तहत अस्थायी निषेधाज्ञा(Temporary Injunction)लागू नहीं है,तो उसे लंबित नहीं रखा जा सकता।
जवाबदेही:
डीसीएलआर स्तर पर होने वाली देरी की अब सीधे जिला स्तर पर समीक्षा होगी।
[ "भूमि विवादों का त्वरित निष्पादन न केवल आम जनता को राहत देगा,बल्कि गांवों में शांति और सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा देगा।"
—विजय कुमार सिन्हा,उपमुख्यमंत्री ]
