विनोद कुमार पांडे ब्यूरो चीफ चिरमिरी की खास खबर
चिरमिरी नगर निगम और ठेकेदारों की लापरवाही से.3 4 टन भारी-भरकम लोहा और 50 से अधिक जीआई शीट गायब, 1 लाख से अधिक की सार्वजनिक संपत्ति पर बड़ा सवाल, जिम्मेदार कौन?
चिरमिरी हल्दीबाड़ी वार्ड क्रमांक 13 स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला परिसर में पुराने दुर्गा पूजा पंडाल एवं स्टेडियम संरचना से निकला लगभग 3 से 4 टन भारी-भरकम लोहा और 50 से अधिक जीआई शीट (छत पर उपयोग होने वाली लोहे की चादरें) रहस्यमयी परिस्थितियों में गायब हो गई हैं। कुल संभावित कीमत 1 लाख रुपये से अधिक आंकी जा रही है। यह मामला अब पूरे शहर में चर्चा और जांच का विषय बन गया है।यह संरचना वर्षों पूर्व South Eastern Coalfields Limited (SECL) द्वारा निर्मित की गई थी। हाल ही में नगर निगम द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्य के दौरान ठेकेदार द्वारा मोटी आई-बीम, गटर, एंगल, लोहे की चादरें और जीआई शीट को काटकर अलग किया गया था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार भारी मात्रा में यह सामग्री कई दिनों तक स्कूल ग्राउंड में खुले में पड़ी रही।
पूर्व में लिए गए विजुअल में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि मजबूत औद्योगिक स्तर का लोहा और जीआई शीट व्यवस्थित रूप से रखी हुई थीं। अब वही सामग्री पूरी तरह गायब है।
संभावित वित्तीय नुकसान
3–4 टन लोहा (बाजार दर ₹34 प्रति किलो के अनुसार) — 1 लाख रुपये से अधिक
50+ जीआई शीट — लगभग ₹20,000
कुल संभावित मूल्य — 1 लाख 20 हजार रुपये से अधिक
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि इतनी मजबूत और मोटी गुणवत्ता की जीआई शीट आज के समय में आसानी से उपलब्ध नहीं होती।
आखिर गया कहां?क्या सामग्री का कोई आधिकारिक स्टॉक रजिस्टर बनाया गया?
क्या तौल कर विधिवत हैंडओवर प्रक्रिया पूरी की गई?
क्या इसे किसी अधिकृत गोदाम में सुरक्षित रखा गया?
क्या इसे कबाड़ बाजार में बेचा गया?
यदि बेचा गया तो किसके आदेश और प्रक्रिया के तहत?
मुख्य मार्ग से इतनी भारी मात्रा में लोहा और जीआई शीट का बिना सार्वजनिक जानकारी के निकल जाना स्वयं में गंभीर जांच का विषय है।
जवाबों में अस्पष्टता
ठेकेदार — “हमने काटकर छोड़ दिया”
इंजीनियर — “जानकारी नहीं है”
महापौर — विस्तृत प्रतिक्रिया देने से परहेज़
पार्षद — “कमिश्नर से पूछिए”
समिति — “शायद चोरी हो गई”
जब इतने बड़े पैमाने पर सार्वजनिक संपत्ति गायब हो और हर स्तर पर जवाब स्पष्ट न मिलें, तो स्वाभाविक रूप से प्रश्न उठते हैं।
प्रशासनिक जवाबदेही
नगर निगम प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है कि निर्माण स्थल से निकलने वाली सार्वजनिक सामग्री का विधिवत सूचीकरण, तौल, सुरक्षित भंडारण और पारदर्शी निस्तारण सुनिश्चित करे। यदि विधिवत प्रक्रिया अपनाई गई है, तो उसका रिकॉर्ड सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?
शहर में चर्चा है, परंतु कोई खुलकर सामने आकर तथ्य स्पष्ट नहीं कर रहा।
क्या यह केवल लापरवाही है?
या प्रशासनिक निगरानी में गंभीर चूक?
या फिर किसी स्तर पर मिलीभगत की आशंका?
यह अब जांच और पारदर्शिता की मांग करता है।
मीडिया ने अपना दायित्व निभाते हुए तथ्य और प्रश्न दोनों सार्वजनिक कर दिए हैं।
अब जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और निर्माण एजेंसी की है कि वे सामने आकर स्पष्ट करें —
आखिर 3 से 4 टन भारी-भरकम लोहा और 50 से अधिक जीआई शीट गईं कहां?
सवाल चिरमिरी की जनता शहर पूछ रहा है क्या प्रशासनिक अधिकारी और नगर निगम की जिम्मेदारी निर्माण कार्य पर लापरवाही बरतने की है कहां थे टाइमकीपर उनकी भी जेब गर्म हुई इंजीनियर की भी जेब गर्म हुई या यह सब मिली जुली भगत से बंदर बाट कर दिया गया सवाल स्कूल प्रबंधक प्रचार पर ही है कहां थे चौकीदार कहां है स्कूल में सीसीटीवी कैमरा जो की शासकीय विभागों पर अनिवार्य रूप से सीसीटीवी कैमरा लगाना अनिवार्य है और इस स्कूल पर आए दिन सामाजिक तत्वों का शाम 6:00 बजे के बाद अड्डा जम रहता है शराब खोरी का किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति ने जिम्मेदारी नहीं निभाई और गैर जिम्मेदारी से यह इतना बड़ा बंदर बाट किया गया
