आनन्द बॉबी चावला ब्यूरो चीफ झांसी।
हेडिंग
*स्वास्थ्य शिशु के जन्म के लिए गर्भावस्था के दौरान अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) के माध्यम से जन्मजात विकारों (birth defects) को कम करने के लिए प्रमुख भूमिका*
*18-20 सप्ताह का 'एनोमली स्कैन' (Anomaly Scan) हर गर्भवती महिला के लिए आवश्यक*
*अल्ट्रासाउंड के माध्यम से जन्मजात विकारों को कम करने की रणनीतियाँ की बारीकियों से NIGF के हर डॉक्टर को हैंड्स ऑन ट्रेनिंग देना ही उनके जीवन का लक्ष्य- डॉ हेमा जे शोभने*
एंकरझांसी।आज दिनांक २५ जनवरी २०२६ को गर्भावस्था में शिशु के जन्मजात विकारों को कैसे कम किया जाए इस विषय पर कार्यशाला का आयोजन, NIGF एवं स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग महारानी लक्ष्मी बाई मेडीकल कॉलेज के तत्वावधान में होटल शीलाश्री में आयोजित किया गया। वर्कशॉप के मुख्य संरक्षक, प्रधानाचार्य, प्रोफेसर डा शिव कुमार जी ने बताया
गर्भावस्था के दौरान अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) के माध्यम से जन्मजात विकारों (birth defects) को कम करने के लिए प्रमुख रणनीति में सही समय पर जाँच (स्कैन) कराना, जरूरी हे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सी एम ओ,डॉ सुधाकर पांडे जी ने बताया कि बुंदेलखंड में हर परिवार को यह जानकारी होनी चाहिए।
NIGF की प्रेसिडेंट डॉ रागिनी अग्रवाल जो गुड़गांव से आयी ने बताया कि
विशेष रूप से 18-20 सप्ताह का 'एनोमली स्कैन' (Anomaly Scan) हर गर्भवती महिला के लिए आवश्यक हे।कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य
अतिरिक्त स्क्रीनिंग (सेकंड ट्राइमेस्टर): इस दौरान 3D/4D अल्ट्रासाउंड डाउंस सिंड्रोम, न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट या विस्तृत हृदय अल्ट्रासाउंड (Fetal Echo) का उपयोग विशिष्ट अंगों की सूक्ष्म जांच के लिए किया जाता हैं।
डॉ हेमा जय शोभने, प्रेसिडेंट उप चैप्टर NIGF ने बताया कि प्रत्येक गर्भवती महिला को १८ से २० हफ्ते में अल्ट्रासाउंड भ्रूण की संरचनाओं, जैसे हृदय, मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और अंगों के विकास की जांच कराना चाहिए, ताकि किसी भी असामान्यता का जल्दी पता लगाकर इलाज या प्रबंधन समय से किया जा सके।
डॉ श्रेयषी शर्मा, जो चेयरपर्सन हे शिशु में बर्थ डिफेक्ट को कैसे कम किया जाए, उन्होंने बताया कि
अल्ट्रासाउंड के माध्यम से जन्मजात विकारों को कम करने की रणनीतियाँ की बारीकियों से NIGF के हर डॉक्टर को हैंड्स ऑन ट्रेनिंग देना ही उनके जीवन का लक्ष्य हे। डॉ विद्या चौधरी एवं डॉ सिप्पी अग्रवाल चेयरपर्सन द्वारा सभी को
11-14 सप्ताह का अल्ट्रासाउंड (NT Scan): की आवश्यकता पर ज़ोर दिया, एवं कहा है कि यह स्कैन भ्रूण के गर्दन के पीछे के हिस्से (Nuchal Translucency) की मोटाई मापता है, जो डाउन सिंड्रोम और अन्य गुणसूत्र संबंधी असामान्यताओं के उच्च जोखिम का संकेत दे सकता है।
डॉ प्रीति कैनाल सचिव, डॉ लक्ष्मी जाटव ट्रेज़र, डॉ रजनी गौतम, डॉ सुचेता राजपूत ने बताया कि 18-22 सप्ताह का टार्गेटेड/एनोमली स्कैन: यह सबसे महत्वपूर्ण स्कैन है जो भ्रूण के अंगों की संरचनात्मक खामियों (हृदय, रीढ़, मस्तिष्क, चेहरा, हाथ-पैर) का विस्तृत विवरण देता है। कार्यक्रम में उपस्थित संरक्षक डॉ संजय शर्मा, डॉ सुनीता अरोरा,डॉ अलका सेठी, डॉ नीरजा कपूर, डॉ सविता दुबे,डॉ मृदुला कत्याल ने बताया की
जन्मजात समस्याओं का जल्दी इलाज: यदि कोई समस्या (जैसे मूत्रमार्ग में रुकावट या डायाफ्रामिक हर्निया) का पता शुरुआती चरणों में चल जाता है, तो गर्भ में ही भ्रूणोस्कोपिक सर्जरी (fetal surgery) द्वारा इसका इलाज संभव हो सकता है। डॉ मनिता देवरिया, डॉ दिव्या जैन, डॉ मनु शुक्ला, डॉ प्रीती गुप्ता ने बताया कि
प्रसवपूर्व परामर्श (Prenatal Counseling): यदि स्कैन में कोई विसंगति पाई जाती है, तो अल्ट्रासाउंड के निष्कर्षों के आधार पर माता-पिता को प्रसव के बाद के प्रबंधन या इलाज के लिए पहले से तैयार रहने में मदद मिलती है।
कार्यक्रम में डॉ ऋतु जैन, डॉ कंचन, डॉ श्वेता प्रधान, डॉ संजुला सिंह, डॉ प्रियंका चौधरी, डॉ प्रियंका सिंह, डॉ दिव्या अग्रवाल, डॉ शैली साहु, डॉ कविता लिटोरिया , डॉ साकेत चौरसिया, डॉ स्वाति अग्रवाल डॉ रॉबर्ट एवं शहर के सभी जाने माने स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ उपस्थित रहे एवं सभी ने हैंड्स ऑन ट्रेनिंग प्राप्त की। अंत में विभागाध्यक्ष एवं चेयरपर्सन डॉ सिप्पी अग्रवाल ने बताया कि फोलिक एसिड: प्रतिदिन 400 mcg फोलिक एसिड का सेवन रीढ़ और मस्तिष्क से संबंधित 70% तक जन्मजात विकारों (Neural Tube Defects) को रोक सकता है।जीवनशैली: संतुलित आहार, नशीले पदार्थों से परहेज और तनाव मुक्त रहना भी जन्मजात विकारों को कम करने के लिए आवश्यक हे एवं उन्होंने सभी को कार्यशाला को सफल बनाने के लिए धन्यवाद दिया।
कैमरामैन शिवम् के साथ आनन्द बॉबी चावला झांसी।

