ब्यूरोचीफ़ शैलेन्द्रसिंह बारडोली गुजरात
केंद्र की भाजपा सरकारने लागू किया उच्च शिक्षा में समता नियम 2026 को लेके पुरे देश में विरोध
केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा लागू किए गए यूजीसी उच्च शिक्षा में समता नियम - 2026 को लेकर देशभर में तीखा विरोध उभरता जा रहा है। विभिन्न सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और नागरिक समूहों का कहना है कि यह नियम समानता के नाम पर असंतुलन और भेदभाव को बढ़ावा देने वाला 'काला कानून' साबित हो रहा है।विरोध कर रहे संगठनों का स्पष्ट आरोप है कि अब तक केंद्र सरकार को जो समर्थन मिल रहा था।
वह उसकी नीतियों और कार्यशैली के कारण था, लेकिन एकतरफा फैसले लोकतंत्र में हमेशा राजा और प्रजा- दोनों के लिए घातक साबित होते हैं।
यूजीसी नियम 2026 : किसे सुरक्षण ओर किसे उपेक्षा? एसटी / एससी / ओबीसी वर्ग के लिए प्रावधान जाति-आधारित भेदभाव से विशेष संरक्षण 24 घंटे में शिकायत की सुनवाई का प्रावधान शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय प्रतिरोध या प्रताड़ना से सुरक्षा Equal Opportunity Centre द्वारा शैक्षणिक, सामाजिक व कानूनी सहायता समता समिति में अनिवार्य प्रतिनिधित्व आवश्यकता पड़ने पर पुलिस व कानूनी कार्रवाई सामान्य वर्ग को लेकर गंभीर सवाल
समान संरक्षण का स्पष्ट प्रावधान नहीं।समता समिति में अनिवार्य प्रतिनिधित्व नहीं।
झूठी शिकायत पर दंड का कोई उल्लेख नहीं।संतुलन बनाए रखने के लिए सुरक्षा तंत्र का अभाव।पुलिस व कानूनी कार्रवाई को लेकर अस्पष्टता।
“सवाल किसी वर्ग से नहीं, नीति की समानता से है" विरोध कर्ताओं का कहना है कि यह संघर्ष किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि नीति की असमानता और एक पक्षीय ढांचे के विरुद्ध है।
यदि कानून सभी के लिए है, तो सुरक्षा और जवाबदेही भी सभी के लिए समान होनी चाहिए। संगठनों ने चेताया है कि यदि इस नियम को तत्काल वापस नहीं लिया गया।
देश के 28 राज्यों में व्यापक जन-आंदोलन और विरोध प्रदर्शन की स्थिति बन सकती है, जिसकी समस्त जिम्मेवारी केंद्र सरकार, भाजपा शासित सरकारों और संबंधित राज्य सरकारों की होगी।
पहले से अवगत कर रहे हैं वे जनभावना की बुलंद आवाज़ है प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह कोई राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि आहत समाज की पीड़ा और चेतावनी है।
सरकार को चाहिए कि वह समय रहते इस कानून की समीक्षा करे, संवाद स्थापित करे और समानता के वास्तविक सिद्धांत को जनता के हित मे लागू करे।
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