दुर्गूकोदल में 30वां दुर्गा महोत्सव शुरू, श्रद्धा और सांस्कृतिक उत्साह का अद्भुत संगम।
पत्रकार - स्वतंत्र नामदेव
कांकेर जिला ब्यूरो
नवरात्रि के पावन अवसर पर दुर्गूकोदल में इस वर्ष एक विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण देखने को मिल रहा है। नवजोत मां दुर्गा उत्सव समिति द्वारा आयोजित 30वां दुर्गा महोत्सव भव्यता के साथ शुरू हो गया है। इस महोत्सव का प्रारंभ 22 सितंबर को पंडित मनीष द्विवेदी द्वारा शुभ मुहूर्त में दुर्गा मंच पर माता की प्रतिमा की स्थापना के साथ हुआ।समिति ने बताया कि यह 30वां वर्षगांठ महोत्सव पहले से कहीं अधिक भव्य और ऐतिहासिक होगा। गाँव और आस-पास के क्षेत्रों में भक्तों के बीच भारी उत्साह है। पंडाल की सजावट, गेट के निर्माण, लाइटिंग और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारियों में ग्रामीण और युवा बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं।
समिति और जिम्मेदारियां
महोत्सव की रूपरेखा समिति के संरक्षक बालमुकुंद सिन्हा और सोमल जैन, अध्यक्ष दीपक जैन, उपाध्यक्ष नरेंद्र जैन, सचिव शंकर नागवंशी और कोषाध्यक्ष गेंदालाल लावते (ओम दुग्गा) ने मिलकर तैयार की है।
विभिन्न व्यवस्थाओं की जिम्मेदारियां इस प्रकार सौंपी गई हैं:
* दुर्गा मूर्ति व्यवस्था: शिवचरण सिन्हा, आनंद माहवे, गेंदालाल लावत्रे, मुन्ना सिन्हा, सुमन नाग, हुमन मरकाम
* साड़ी व्यवस्था: अनुराग त्रिवेदी
* ज्योति/घी व्यवस्था: जोहतरीन गौतम
* फल व्यवस्था: माहरू राम नाग, दीपक जैन
* भंडारा: कन्हैया लाल शोरी और अन्य पदाधिकारी
इनके अलावा, बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दानदाता भी सहयोग राशि प्रदान कर इस आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम
यह महोत्सव 9 दिनों तक चलेगा। इन दिनों में प्रतिदिन सुबह और शाम पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी। मंच पर नृत्य, गीत-संगीत और नाटक की प्रस्तुतियां भी होंगी। साथ ही, सामूहिक भंडारा भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा।
सामाजिक सद्भाव का संकल्प
नवजोत मां दुर्गा उत्सव समिति ने इस बार एक विशेष संकल्प लिया है कि यह आयोजन सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक धरोहर को भी मजबूत करेगा। समिति का कहना है कि यह महोत्सव सामाजिक एकता और सहयोग की एक मिसाल बनेगा।
गाँव में नवरात्रि का उत्सव अपने चरम पर है। प्रतिदिन सुबह और शाम माता रानी की पूजा-अर्चना में ग्रामीण बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। दुर्गूकोदल का यह 30वां दुर्गा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और भव्यता का एक अद्भुत संगम बनकर पूरे क्षेत्र में आस्था का केंद्र बन गया है।
