ब्यूरो रिपोर्ट
बूंदी
*मालियो की बाड़ी में टापू पर फंसे 162 लोग, सेना-एनडीआरएफ ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन**जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा और एसपी राजेंद्र मीणा की मौजूदगी में चला बचाव कार्य*
*सेना के 3 कॉलम, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने बोटों के सहारे लोगों को सुरक्षित निकाला*
*प्रशासन ने संभाला मोर्चा, रेस्क्यू किए गए लोगों के लिए भोजन-आवास के पुख्ता इंतजाम*
बूंदी जिले में पिछले दो दिनों से लगातार हो रही अतिवृष्टि के कारण नदी-नाले उफान पर हैं और कई निचले इलाके पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। सबसे विकट स्थिति मालियो की बाड़ी में देखने को मिली, जहां खेत और बस्तियां एक टापू में तब्दील हो गईं और बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी जान बचाने के लिए पानी के बीच फंस गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए सूचना मिलते ही जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा और पुलिस अधीक्षक राजेंद्र कुमार मीणा तत्काल मौके पर पहुंचे। स्थिति का जायजा लेने के बाद उन्होंने तुरंत एक बड़े संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन का निर्देश दिया। सेना, एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा मोचन बल) और एसडीआरएफ (राज्य आपदा मोचन बल) की टीमें देवदूत बनकर मौके पर पहुंचीं।*घंटों चला ऑपरेशन, सुरक्षित निकले 162 लोग*
कलेक्टर और एसपी की निगरानी में बचाव कार्य शुरू हुआ। सेना के 3 कॉलम के जवान, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की एक-एक टीम अपनी-अपनी बोटों और बचाव उपकरणों के साथ पानी के तेज बहाव के बीच फंसी जिंदगियों को बचाने में जुट गई। घंटों की कड़ी मशक्कत और सूझबूझ के बाद, बचाव दलों ने बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों सहित कुल 162 लोगों को सफलतापूर्वक सुरक्षित बाहर निकाल लिया। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए जाने के बाद उनकी अटकी हुई सांसें वापस लौटीं और उन्होंने प्रशासन व सेना का आभार व्यक्त किया। मौके पर मौजूद जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा ने बताया, हमारी पहली प्राथमिकता हर एक नागरिक की जान बचाना है। जिले में जहां कहीं भी जलभराव से लोगों के फंसे होने की सूचना मिल रही है, वहां तत्काल टीमें भेजकर रेस्क्यू किया जा रहा है। सभी रेस्क्यू किए गए लोगों के लिए भोजन, आवास,और चिकित्सा सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दे दिए गए हैं। राहत और बचाव कार्य लगातार जारी रहेगा। पुलिस अधीक्षक राजेंद्र कुमार मीणा ने बताया कि पुलिस बल भी बचाव कार्यों में पूरा सहयोग कर रहा है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें और किसी भी आपात स्थिति में जिला कंट्रोल रूम को सूचित करें।