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बोकारो: बोकारो न्यायालय: एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज तृतीया द्वारा पॉस्को एक्ट के तहत अभियुक्त अताउल अंसारी को 25 साल की कठोर सजा


बोकारो न्यायालय: एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज तृतीया द्वारा पॉस्को एक्ट के तहत अभियुक्त अताउल अंसारी को 25 साल की कठोर सजा        

 ब्यूरो रिपोर्ट 


बोकारो, 05 मई 2025: बोकारो के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज तृतीया, श्री देवेश त्रिपाठी की अदालत ने आज एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 14 वर्षीय नाबालिग के साथ बलात्कार के मामले में अभियुक्त अताउल अंसारी को पॉस्को एक्ट (Protection of Children from Sexual Offences Act) के तहत 25 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही, अदालत ने अभियुक्त पर 20,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। यदि जुर्माना अदा नहीं किया जाता, तो अताउल अंसारी को एक वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

मामले का विवरण यह घटना वर्ष 2023 की है, जब जागेश्वर बिहार थाना क्षेत्र में अताउल अंसारी ने 14 साल की एक नाबालिग लड़की को चाकू दिखाकर डराया और उसके साथ बलात्कार किया। बलात्कार के बाद पीड़िता बेहोश हो गई, और अभियुक्त मौके से फरार हो गया। स्थानीय लोगों की मदद से पीड़िता के पिता को घटना की जानकारी मिली, जिन्होंने तुरंत थाने में शिकायत दर्ज कराई। मामला बोकारो के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज तृतीया की अदालत में चला, जिसे पॉस्को एक्ट के तहत विशेष केस (106/2023) के रूप में दर्ज किया गया।

कोर्ट की कार्यवाहीमामले की सुनवाई के दौरान अभियुक्त की ओर से अधिवक्ता सुबोध कुमार यादव ने बहस की, जबकि सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक (Special Public Prosecutor) श्री वीरेंद्र कुमार ने जोरदार पैरवी की। पीड़िता के पक्ष में जूनियर अधिवक्ता श्री कृष्ण देव प्रसाद ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। श्री वीरेंद्र कुमार की प्रभावी दलीलों और ठोस गवाहियों के आधार पर अदालत ने अभियुक्त को दोषी पाया और कठोर सजा सुनाई।फैसले का महत्वजज श्री देवेश त्रिपाठी द्वारा सुनाया गया यह फैसला बोकारो के न्यायिक इतिहास में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। इस तरह की कठोर सजा न केवल अपराधियों के मन में भय पैदा करती है, बल्कि समाज में यह संदेश भी देती है कि यौन अपराधों, खासकर बच्चों के खिलाफ अपराधों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विशेष लोक अभियोजक श्री वीरेंद्र कुमार ने इस केस में अपनी पूरी निष्ठा और मेहनत से पीड़िता के परिवार को न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभाई।सामाजिक संदेशयह फैसला समाज के लिए एक मजबूत संदेश है कि गवाही में ईमानदारी और साहस से अपराधियों को सजा दिलाई जा सकती है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए सटीक गवाही और मजबूत कानूनी पैरवी जरूरी है। समाज को यह समझना होगा कि ऐसी घटनाओं को नजरअंदाज करना या सामाजिक इज्जत के नाम पर चुप रहना अपराध को बढ़ावा देता है।अपील और सुझावन्यायालय पर भरोसा रखें और ऐसी घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाएं। 

बोकारो के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज तृतीया श्री देवेश त्रिपाठी जैसे निष्ठावान और कर्मठ जजों की मौजूदगी यह सुनिश्चित करती है कि पीड़ितों को न्याय जरूर मिलेगा। समाज से अपील है कि यौन अपराधों के खिलाफ जागरूक रहें, गवाही में सच्चाई बरतें, और पीड़ितों का साथ दें। इस फैसले से न केवल पीड़िता और उसके परिवार को न्याय मिला, बल्कि समाज में यह संदेश भी गया कि अपराधियों को कठोर सजा देकर ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है। बोकारो न्यायालय का यह फैसला अन्य अदालतों और समाज के लिए एक उदाहरण है।


 बोकारो न्यायालय: एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज तृतीया द्वारा पॉस्को एक्ट के तहत अभियुक्त अताउल अंसारी को 25 साल की कठोर सजा बोकारो, 05 मई 2025: बोकारो के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज तृतीया, श्री देवेश त्रिपाठी की अदालत ने आज एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 14 वर्षीय नाबालिग के साथ बलात्कार के मामले में अभियुक्त अताउल अंसारी को पॉस्को एक्ट (Protection of Children from Sexual Offences Act) के तहत 25 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही, अदालत ने अभियुक्त पर 20,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। यदि जुर्माना अदा नहीं किया जाता, तो अताउल अंसारी को एक वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।मामले का विवरणयह घटना वर्ष 2023 की है, जब जागेश्वर बिहार थाना क्षेत्र में अताउल अंसारी ने 14 साल की एक नाबालिग लड़की को चाकू दिखाकर डराया और उसके साथ बलात्कार किया। बलात्कार के बाद पीड़िता बेहोश हो गई, और अभियुक्त मौके से फरार हो गया। स्थानीय लोगों की मदद से पीड़िता के पिता को घटना की जानकारी मिली, जिन्होंने तुरंत थाने में शिकायत दर्ज कराई। मामला बोकारो के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज तृतीया की अदालत में चला, जिसे पॉस्को एक्ट के तहत विशेष केस (106/2023) के रूप में दर्ज किया गया।कोर्ट की कार्यवाहीमामले की सुनवाई के दौरान अभियुक्त की ओर से अधिवक्ता सुबोध कुमार यादव ने बहस की, जबकि सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक (Special Public Prosecutor) श्री वीरेंद्र कुमार ने जोरदार पैरवी की। पीड़िता के पक्ष में जूनियर अधिवक्ता श्री कृष्ण देव प्रसाद ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। श्री वीरेंद्र कुमार की प्रभावी दलीलों और ठोस गवाहियों के आधार पर अदालत ने अभियुक्त को दोषी पाया और कठोर सजा सुनाई।फैसले का महत्वजज श्री देवेश त्रिपाठी द्वारा सुनाया गया यह फैसला बोकारो के न्यायिक इतिहास में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। इस तरह की कठोर सजा न केवल अपराधियों के मन में भय पैदा करती है, बल्कि समाज में यह संदेश भी देती है कि यौन अपराधों, खासकर बच्चों के खिलाफ अपराधों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विशेष लोक अभियोजक श्री वीरेंद्र कुमार ने इस केस में अपनी पूरी निष्ठा और मेहनत से पीड़िता के परिवार को न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभाई।सामाजिक संदेशयह फैसला समाज के लिए एक मजबूत संदेश है कि गवाही में ईमानदारी और साहस से अपराधियों को सजा दिलाई जा सकती है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए सटीक गवाही और मजबूत कानूनी पैरवी जरूरी है। समाज को यह समझना होगा कि ऐसी घटनाओं को नजरअंदाज करना या सामाजिक इज्जत के नाम पर चुप रहना अपराध को बढ़ावा देता है।अपील और सुझावन्यायालय पर भरोसा रखें और ऐसी घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाएं। बोकारो के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज तृतीया श्री देवेश त्रिपाठी जैसे निष्ठावान और कर्मठ जजों की मौजूदगी यह सुनिश्चित करती है कि पीड़ितों को न्याय जरूर मिलेगा। समाज से अपील है कि यौन अपराधों के खिलाफ जागरूक रहें, गवाही में सच्चाई बरतें, और पीड़ितों का साथ दें।इस फैसले से न केवल पीड़िता और उसके परिवार को न्याय मिला, बल्कि समाज में यह संदेश भी गया कि अपराधियों को कठोर सजा देकर ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है। बोकारो न्यायालय का यह फैसला अन्य अदालतों और समाज के लिए एक उदाहरण है।

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