गुरुदेव शिष्य के कर्म को बदल देते है: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
🙏🙏🌹🌹🙏🙏🌹🌹"सादर जय सियाराम"
आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज का एक अत्यंत मार्मिक और हृदय- स्पर्शी सूत्रों आपसे साझा कर रहा हूं , जो वास्तव में गुरु-शिष्य परंपरा की आत्मा को उजागर करता है ।
गुरुदेव का दिव्य वचन एवं विस्तार भाव :
1-सद्गुरु का नि:स्वार्थ संकल्प :
गुरुदेव का हृदय हर एक क्षण एक ही प्रार्थना करता है ।
"चाहे मुझे भगवतप्राप्ति न हो पर मेरे शिष्य को भगवतप्राप्ति अवश्य होनी चाहिए ।"
क्यों ?
क्योंकि गुरु दीपक है- स्वयं जलकर शिष्य के जीवन में प्रकाश भर देता है ।
गुरु का अपना कोई स्वार्थ नहीं होता है ।
इतिहास साक्षी हैं :
समर्थ गुरु रामदास ने शिवाजी को क्षत्रपति बना दिया , स्वयं फटी गुदड़ी में जीवन बिताया ।
रामकृष्ण परमहंस जी कैंसर की पीड़ा सहते रहे ,पर चिंता नरेंद्र की करते रहे-कि वो विवेकानंद कैसे बने ।
गुरु का परम आनू इसी में है ।
"मेरा शिष्य मुझसे भी आगे निकल जाए ।"
दूसरा रिश्ता है मां का ।
मां भी प्राण देकर बच्चे का भला चाहती है ।
खुद भूखी सो जाएगी , पर पर अपने बच्चे को भूखा नहीं बुलाएगी ।
खुद फटे वस्त्र पहनेगी ,पर पर अपने बच्चे को नया वस्त्र पहनाएगी ।
इसलिए शास्त्र उद्धोष करते हैं- गुरु और माता , भगवान , से भी पहले पूज्य हैं ।
क्योंकि भगवान कर्म फल देते हैं
पर गुरुदेव शिष्य के कर्म को बदल देते है ।
और मां बिना कर्म देखें ही आशिर्वाद दे देती है ।
3-आचार्य जी का हृदय-भेदी सूतरे "गुरु-शिष्य का हाथ तब भी नहीं छोड़ता ,जब शिष्य गुरु का हाथ छोड़ देता है ।
गुरु की दृष्टि सदा अपने शिष्य के पीठ पर रहती है -कहीं गिर न जाए , संभाल लूं ।"
"संसार पिता कहता है-मेरा बेटा बड़ा आदमी बने ।
और गुरुदेव कहते है-मेरा शिष्य बड़ा भक्त बने ।"
"निष्कर्ष एवं निवेदन"
जिसके जीवन में सच्चा सद्गुरु मिल गया , समझो उसका बेड़ा पार हो गया ।
गुरुदेव की कृपा एक कृपा-दृष्टि शिष्य के करोड़ों जन्मों के पाप भस्म कर देती है ।
गुरु देह छोड़कर भी नहीं मरता-गुरुदेव सदा अपने शिष्य के हृदय में जीवित रहते हैं ।
आप सभी भक्तगण करबद्ध प्रार्थना - इस सत्संग को अपने परिवार , मित्रों और विशेषकर युवा पीढ़ी तक पहुंचाएं ताकि युवा पीढ़ी भी पूर्णतः लाभ ले सकते ।
गुरु केवल व केवल एक व्यक्ति नहीं अपितु गुरु एक तत्व है- जो हमें 'मै , से 'वह' तक की यात्रा कराता है ।
यही पर वाणी का विराम ।
सादर जय सियाराम ,
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
संपर्क सूत्र:-6396372583,
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