गुरुदेव 'समाधान' नहीं देते, परम-विश्राम देते हैं: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
🙏🙏🌹🌹🙏🙏🌹🌹"सादर जय सियाराम"
गुरुदेव 'समाधान' नहीं देते, परम-विश्राम देते हैं ।
"समाधान नहीं परम-विश्राम"
'समाधान' और 'परम-विश्राम' में भेद :
'सामाधान' तात्पर्य समस्या का अंत ।
'परम-विश्राम तात्पर्य समस्या के बीज का ही अंत ।
समाधान में 'मै' बच जाता है -"चलो, मेरी समस्या सुलझ गई"।
परम-विश्राम में 'मै' ही मिट जाता है ।
'शोक गए' -यह समाधान नहीं है ,
अपितु शोक का कारण ही गया-यह 'परम विश्राम' है ।
'समस्या' का 'हल' मत मांगो , अपितु 'समस्याग्रस्त' विलय मांगों ।
'समाधान' तो 'संसार' भी दे देता है , 'परम-विश्राम' केवल 'सद्गुरु' देते हैं ।
'दास' जब तक'दास' है , तब तक समाधान' चाहिए ।
न सुख की चाह , न दुःख का भय ।
'दासता' पराकाष्ठा पर पहुंचे ,
बोलिए 'शोक-निवृत्ति-कर्ता' सद्गुरुदेव भगवान की जय🌸
बोलिए 'परम-विश्राम-दाता' सद्गुरुदेव भगवान की जय🌸
बोलिए 'विश्राम-सिंधु' सीताराम जी महाराज की जय 🙏
बोलिए 'परम-विश्राम-धाम' सीताराम की जय 🙏
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
🙏🙏🌹🌹🙏🙏🌹🌹
.jpg)