गुरुदेव रुपी तरु की छाया में बैठकर शिष्य परम विश्राम को प्राप्त कर पाता है:आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
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"सादर जय सियाराम"
गुरुदेव की गोद में बालक अर्थात शिष्य के रूप स्वयं राम जी बैठे हैं, और कह रहे हैं ।
"जो शिशु के समान निरछल होगा , वही हमारा गोद पायेगा अथवा ।"
दूसरा भाव यह है कि पूज्य गुरुदेव भगवान वशिष्ठ जी के गोद में स्वयं भगवान राम जी शिष्यवत भाव से गोद में बैठें हैं अथवा पूज्य गुरुदेव भगवान वशिष्ठ जी ने स्वयं गोद में बिठाया है ।
गुरुदेव रुपी तरु की छाया में बैठकर शिष्य परम विश्राम को प्राप्त कर पाता है ।
आपका मार्गदर्शक आपके पूज्य गुरुदेव ,
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
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