कानपुर देहात
सुरेन्द्र मिश्रा
रसूलाबाद विधानसभा में नए चेहरे की सुगबुगाहट तेज, भाजपा से रिटायर्ड पुलिस उपाधीक्षक कृष्ण मुरारी दोहरे के नाम की चर्चा
कानपुर देहात रसूलाबाद, आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर रसूलाबाद विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मियां लगातार तेज होती जा रही हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों के संभावित प्रत्याशियों को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी से एक नए दलित चेहरे की संभावित दावेदारी ने क्षेत्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। राजनीतिक गलियारों से लेकर गांव-गांव की चौपालों तक रिटायर्ड पुलिस उपाधीक्षक (सीओ) कृष्ण मुरारी दोहरे का नाम चर्चा का विषय बना हुआ है।रसूलाबाद विधानसभा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है। ऐसे में भाजपा के संभावित उम्मीदवारों को लेकर क्षेत्र में लगातार मंथन चल रहा है। पार्टी के कई पुराने और नए दावेदार सक्रिय हैं, लेकिन हाल के दिनों में कृष्ण मुरारी दोहरे का नाम तेजी से उभरकर सामने आया है। लंबे समय तक पुलिस विभाग में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं देने के बाद सेवानिवृत्त हुए कृष्ण मुरारी दोहरे को प्रशासनिक अनुभव और जनसंपर्क के आधार पर एक मजबूत दावेदार के रूप में देखा जा रहा है।
परसौरा,नैला, धरमूपुर, अकौडिया, मनावां, मालका पुरवा, राजऊ, बहादुरपुर, असालतगंज, तिश्ती समेत कई गांवों में दलित मतदाताओं से बातचीत के दौरान लोगों ने बताया कि पिछले चुनावों में किए गए कई वादे अधूरे रह गए। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधियों की क्षेत्र में सक्रियता अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही। ऐसे में इस बार जनता पुराने राजनीतिक चेहरों की बजाय नए विकल्पों पर भी गंभीरता से विचार करती दिखाई दे रही है। वहीं अन्य समाज के मतदाताओं ने भी नए चेहरे पर भरोसा जताया है उनका कहना है कि नया चेहरा ही यहां पर भाजपा को जीत दिला सकता है ऐसे में कृष्ण मुरारी दोहरे पर सभी समाज के मतदाता भरोसा जाता रहे हैं कि यह जातिगत और भेदभाव की राजनीति से अलग हटकर अधिकारी होने के नाते धरातल पर सभी को बराबर सम्मान और सभी की समस्याओं को बराबर रूप से देखेंगे मतदाताओं ने कहा कि अन्य जनप्रतिनिधियों पर भरोसा करके देखा गया लेकिन वह अपने जिम्मेदारी और अपने कर्तव्यों पर खरे नहीं उतर सके
क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि कई संभावित दावेदार अलग-अलग दलों में रह चुके हैं और उनकी राजनीतिक कार्यशैली से जनता भली-भांति परिचित है। ऐसे में प्रशासनिक अनुभव रखने वाले और शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली को समझने वाले व्यक्ति को मौका दिए जाने की मांग भी कुछ वर्गों में सुनाई दे रही है। इसी कारण कृष्ण मुरारी दोहरे का नाम लगातार चर्चा में बना हुआ है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दलित समाज में उनकी स्वीकार्यता और प्रशासनिक पृष्ठभूमि भाजपा के लिए लाभकारी साबित हो सकती है। स्थानीय लोग कन्नौज के विधायक एवं समाज कल्याण मंत्री तथा पूर्व आईपीएस अधिकारी असीम अरुण का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि प्रशासनिक अनुभव रखने वाले जनप्रतिनिधि विकास कार्यों को बेहतर ढंग से आगे बढ़ा सकते हैं। यही कारण है कि क्षेत्र के कई लोग कृष्ण मुरारी दोहरे को एक संभावित विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
वहीं कृष्ण मुरारी दोहरे भी हाल के दिनों में क्षेत्र में सक्रिय नजर आ रहे हैं। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि यदि पार्टी उन्हें मौका देती है तो वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विकासवादी नीतियों को गांव-गांव तक पहुंचाने का कार्य करेंगे। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और किसानों की समस्याओं के समाधान को अपनी प्राथमिकता बताया।
फिलहाल भाजपा की ओर से किसी भी प्रत्याशी के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन रसूलाबाद विधानसभा की राजनीति में नए चेहरे को लेकर चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में पार्टी का फैसला और स्थानीय राजनीतिक समीकरण इस सीट को और अधिक दिलचस्प बना सकते हैं। वर्तमान परिस्थितियों में रिटायर्ड पुलिस उपाधीक्षक कृष्ण मुरारी दोहरे का नाम रसूलाबाद विधानसभा की सियासत में तेजी से उभरते हुए चेहरों में शामिल माना जा रहा है।
