ब्यूरोचीफ शैलेन्द्रसिंह बारडोली गुजरात
1,180 करोड़ रुपये का माल एक पोर्ट, एक जगह और बार-बार ड्रग्स। यह इत्तेफाक है या कुछ और?
मुंद्रा पोर्ट गुजरात एक्सप्रेसवे सफेद जहर के सुरक्षित काले धंधे के लिए खुला!: पांच साल में 19 बार 11,311 करोड़ रुपये के ड्रग्स, हेरोइन पकड़े गए।
गुजरात सरकार के होम मिनिस्टर जब भी स्टेज से स्पीच देते हैं, तो उन्हें जनता को दो बातें ज़रूर सुनाते है, नशा-मुक्त गुजरात की दिशा में BJP सरकार का काम और कानून के दायरे में रहने पर फायदा होगा, बल्कि चम्मरबंधी की वरघोड़ा भी निकलेगा। हालांकि, आज तक होम मिनिस्टर हर्ष संघवी की बयान बाजी में आज तक किसी की चाल या रवैया बदलने में नाकाम रहे हैं, जैसा कि गुजरात के क्राइम रेट के आंकड़े बताते हैं।दूसरी ओर न ड्रग्स रुक रहे हैं, न शराब और न ही क्राइम, जो गुजरात से कम होने का नाम नहीं ले रहा, लेकिन नाम बड़े और दर्शन खोते जैसा है, ओर गुजरात के बेरोजगार लोग देख रहे हैं।
अभी तक गुजरात सरकार की कोई भी इंटेलिजेंस एजेंसी यह पता नहीं लगा पाई है कि पिछले पांच सालों में गुजरात से जब्त किए गए करोड़ों के सफेद जहर ड्रग्स कहां से आजतक अभी भी पता करने में ही लगी फिरभी कोई ड्रग्स माफिया नहीं मिला।कुछ समय पहले जब से आम आदमी पार्टी ने पंजाब के रास्ते आने वाले ड्रग माफिया पर लगाम लगाई है, तस्करों ने अपना रूट बदलकर दूसरा रूट ढूंढ लिया वोरास्ते से सुरक्षित समुद्री रूट, मुद्रा पोर्ट, गुजरात मे तस्कर पाकिस्तान से भारत में ड्रग्स भेजनेमें सफल हैं, यहां के युवाओं को बर्बाद कर रहे हैं और टेरर फंड को बढ़ा रहे हैं, और मुद्रा पोर्ट इन मौत के सौदागरों तस्करों के लिए एक वरदान है, जिसके लिए सबूत ढूंढने की जरूरत नहीं है।
सितंबर 2021 के महीने में 21,000 हजार करोड़ की 2,998 किलो हेरोइन जब्त की गई, जो अब तक के इतिहास में सबसे बड़ी मात्रा है। मई 2022 में 260 करोड़ रुपये की 52 किलो कोकीन, जुलाई 2022 में 150 करोड़ रुपये की 75 किलो हेरोइन, 2024 में दो बार ट्रामाडोल टैबलेट की मात्रा पकड़ी गई और उससे एक दिन पहले मई 2026 में 1,180 करोड़ रुपये की 118 किलो कोकीन ब्राज़ील से कराची होकर मुद्रापोर्ट तक सलामत पहुंचा जिसकी भनक बड़ी बड़ी सुरक्षा एजेंसियों को भनक तक नहीं आई।5 साल में सफेद ज़हर के काले धंधे के 19 मामले सामने आए हैं, जिनमें अब तक मुद्रापोर्ट से भारी मात्रा में ड्रग्स, हेरोइन या दूसरे नशीले पदार्थ ज़ब्त किए जाने के सबसे ज़्यादा मामले सामने आए हैं। तो सवाल ये उठता है कि यह मुद्रा पोर्ट क्यों? इसका सीधा कारण वोहीरहा इस प्राइवेट पोर्ट अडानी की सरकारी निगरानी या सघन चेकिंग व्यवस्था नहीं है, क्या एक सोची समझी चाल है? ये सब सलामत होने के पीछे एक ही वजह गुजरात राज्य में BJP सरकार है। इन सबको मिलाकर आज एक सिंडिकेट बनगई है, जैसे BJP के ड्रग सिंडिकेट ने देश के युवाओं की मौत का सौदा कर लिया हो, जैसा कि अडानी पोर्ट से ज़ब्त की गई भारी मात्रा में ड्रग्स और हेरोइन से साफ़ हो रहा है।
पहले सपने तोड़ो, खेलों में घोटाले करो, पेपर लीक करो, अग्निवीर के नाम पर पैसे कमाओ, फिर जब थका-हारा युवा टूटने पर मजबूर हो जाता है, तो चुनाव के दौरान उसे दिए गए रोज़गार के खोखले वादे भी बेरोज़गारों के लिए एक स्कीम साबित होते हैं। जैसा कि कहावत है, हारने वाला दोगुना जुआ खेलता है, वैसा उसे ड्रग्स की ओर धकेलता है, इससे साफ़ हो जाता है कि सरकार का उसे बर्बाद करने का बुरा इरादा ऐसे समय में साफ़ हो जाता है जब यह कोई इत्तेफ़ाक नहीं बल्कि एक सोचा-समझा सिस्टम है।


