ब्यूरोचीफ शैलेन्द्रसिंह बारडोली गुजरात
पेट्रोल डीजल बचाने की बात करते भारतके प्रधानमंत्री आपही कलसे नेधरलैंड,स्वीडन, यूएई, नॉर्वे, इटाली का दौरा पर तब जनताको क्या संदेसा देना चाहते हो?
भारत देशके प्रधानमंत्री मोदी की नज़र आपके सोने पर है। मंदिरों में 25,000 टन सोना पड़ा है, लोगों के घरों में भी 20 से 25 हजार टन सोना पड़ा है और RBI के पास 800 टन सोना पड़ा है लेकिल असली खेल यह है कि झारखंड और छत्तीसगढ़ में जो सोने की खदान का ठेका जो मिला है वो अडानी को मिला है।और इसीलिए जंगलों से आदिवासियों का विस्थापन जबरन सरकार करवारही है। इधर से लिथियम की खदान जम्मू कश्मीर में मिल ही चुकी है। जम्मू-कश्मीर को तोड़ने का, 370 की नौटंकी का यही खेल पहले से ही तयथा। ओर प्रधानमंत्री ओर अमित शाहने अपनी सोचको वास्तविकता मे बदल दिया।
जम्मू कश्मीर मे लिथियम की मदद से बैटरियां बनेंगी, इलेक्ट्रिकल व्हीकल बिकेंगे, तो अडानी जो है दिन-रात 24 घंटे बस पैसेही बनाने पर लगा रहेगा। और पैसे बनाने की इस मशीन के चक्कर में यह आपको कह रहा है कि पेट्रोल-डीजल मत फूंकों।
दुसरी ओर मंचसे प्रधानमंत्री कह रहे है कि रैलियां मत करो, अगर किसी नेता की रैली हो जाए, उसका चेहरा चमक जाए, तो इसको प्रॉब्लम हो जाएगी। रैली ना करने की नसीहत देकर खुद रोड शो पर निकल गया। कितनी दोगली सोच के इंसानने पुरे देशको बेचकर बर्बाद करना चाहता है।लोगों को कह रहे है कि आपकी देशभक्ति ललकार रही है और विदेश की यात्रा ना करें, और अपने आप कह रहा है कि इज़राइल इसका बाप है। अपने नाजायज बाप के लिए, उस अडानी के लिए इस देश के जंगलों को काटना, अंडमान निकोबार को बर्बाद करना, पूरे वन क्षेत्र का खात्मा करना और दुनिया को यह कहना कि 'एक पेड़ माँ के नाम', कितना जायज है वो देश की जनता केलिए सोचनेवाली बात बनचुकी है।
आप ही खुद ही तय कीजिए कि इस देश में आप निर्णय नहीं कर पा रहे, आपके गांव में बुलडोजर चला रहा है प्रशासन। मतलब वो बता रहे हैं कि मालिक प्रशासन है, DC मालिक हो गया। अरे ये DC का पद कब आया है? ये देश में 1947 के बाद जितने पद बने या अंग्रेजों ने जो पद बनाए, उससे बहुत पहले के गाँव हैं हमारे।
हमारी व्यवस्था बहुत पहले की है
हालांकि ठीक है, इसी बहाने से हमें अपनी असलियत पता चलेगी। भाईचारा दोबारा ज़िंदा करना पड़ेगा, अपने गाँव में अपनी व्यवस्था दोबारा बनाएंगे, तो इनकी क्या ज़रूरत पड़ेगी फिर? अगर मेट्रो का खेल खेल रहे हैं ना, यह कह रहे हैं कि मेट्रो में सफर करो। क्यों कह रहा है मालूम है आपको? क्योंकि मेट्रो में 'वन कार्ड' बनेगा, वो वन कार्ड आपके अकाउंट से जुड़ेगा, UPI से पेमेंट हुआ करेगी। और उस UPI की पेमेंट को ऑटोमैटिक ट्रांजेक्शन में बदलकर यह एक माहौल बनाना चाहते हैं कि हर व्यक्ति उस तरफ चला जाए।
लेकिन प्रधानमंत्री का असली खेलतो आपके सोने का है। सोना खरीदना है जितना चाहे उतना खरीदिए, वरना ये इंतजार कर रहे हैं कि जब अडानी के पास सोना आ जाए तब लोग खरीदेंगे और उस वक्त मालामाल होगा अडानी। और अभी इसको छोटे सुनार तो बर्बाद करने ही हैं, इस खेल में तो लंबा यह चल ही रहा है पिछले कई साल से।

