TTN 24न्यूज
ब्यूरो रिपोर्ट,भोपाल, मध्यप्रदेश
मध्यप्रदेश का रायसेन 12 वी शताब्दी में अपनी ऐतिहासिक वीरता 700 महिलाओं के जौहर ओर पारस पत्थर के रहस्य के लिए प्रसिद्ध किला माना जाता है।
ऐतिहासिक रूप में 16वी शताब्दी 1543 मे रायसेनके प्रसिद्ध राजा पूरणमल थे जो एक राजपूत खानदान के शासक थे वो अपनी वीरता ओर शेरशाह सुरी के खिलाफ संघर्ष केलिए जानेजाते है।किले का निर्माण कार्य 1143 के आसपास परमार राजा राय पिथोरानेकरवाया था जिसपर बादमें कई राजाओंने शासन किया। 494 साल पहले 6 मई के ही के दिन रायसेन के इसी ऐतिहासिक किले पर रानी दुर्गावती ने अपनी 700 राजपूतानियों के साथ जौहर किया था।इतिहास के पन्नो में इस दिन को अपने साथ इस जौहर की दास्तान को हमेशा याद रखेगा।
"जौहर'’ से हार गया था बहादुर शाह द्वतीय।पूरे देश के लिए शायद 6 मई का दिन एक आम दिनों की तरह ही होगा लेकिन रायसेन के लिए 6 मई का दिन अपने आपमें रानी दुर्गावती और उनके साथ 700 राजपूतानियों के जौहर के लिए याद किया जाता है।रानी दुर्गावती ने जब ये देखा कि हमारी सेना बहादुर शाह से हारने की कगार पर है तो उन्होंने अपने आत्मगौरव के लिए रायसेन किले के अग्निकुंड में 700 राजपूतानियों के मुद्दामाल साथ जौहर कर लिया था।और राजा सिलादित्य ने भी अपने जीवन का मोह छोड़ अगले तीन दिनों तक अपने से कई गुनी बड़ी सेना से लड़ते वीरगति को प्राप्त हुए।
उसी समय बहादुर शाह भी रायसेन के इसी ऐतिहासिक क़िले पर महज़ कुछ घंटों के लिये ही राजा बन पाया था उसके बाद रानी दुर्गावती और राजा सिलादित्य के बेटे भूपति राय ने बहादुर शाह को भगा दिया था।


