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गुरुदेव किस बात की परीक्षा लेते हैं ये शिष्य को पता भी नहीं चलता: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज

 

गुरुदेव किस बात की परीक्षा लेते हैं ये शिष्य को पता भी नहीं चलता: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज 

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         "सादर जय सियाराम"

             "आज का सत्संग"

 आज हम आप आप लोगों से एक परिसंवाद करेंगे ।

"गुरु पग-पग पर शिष्य की परीक्षा लेता है"

गुरु पग-पग पर अपने शिष्य की परीक्षा लेता है शिष्य किस योग्य है ।

गुरुदेव किस बात से फर्क लेते हैं ये शिष्य को पता भी नहीं चलता 

गुरुदेव की परीक्षा शिष्य की समझ से बाहर है ।

ये गूढ रहस्य समझना आम लोगों की बस की बात नहीं ।

साधना का कार्य इतना आसान नहीं है ।

जितना आसान समझ लिया गया है ।

केवल मात्र दो चार आसान या आंख नाक बंद कर लेने ध्यान लगाने से ही साधना संपन्न नहीं हो जाती है ।

इसके लिए बहुत अधिक कठिन परिश्रम की आवश्यकता होती है 

यह ज्ञान पुस्तकों के माध्यम से प्राप्त नहीं हो सकता है ।

इसके लिए एक योग्य गुरु की निर्देशन की आवश्यकता होती है 

गुरुदेव ही इस क्षेत्र में सफलता प्राप्त करा सकते हैं ।

शिष्य को आगे बढ़ाने के लिए मार्ग प्रशस्त करते हैं ।

गुरुदेव और शिष्य का संबंध का सबसे पवित्र और मधुर संबंध है 

इसमें दोनों ही त्याग की भावना रखते हैं ।

जब तक स्वार्थ होता है तब तक न गुरु अपने शिष्य को कुछ दे सकता है ।

न शिष्य ही गुरु से कुछ प्राप्त कर सकता हैं ।

क्योंकि जब तक मन में स्वार्थ की भावना होगी तब तक गुरु और शिष्य एक दूसरे के हृदय परस्पर जुड़ नहीं पायेंगे और जब तक ऐसा नहीं होता तब ज्ञान प्राप्त संभव नहीं है ।

गुरुदेव ज्ञान देकर अपने शिष्य की सेवा करते हैं ।

उसके बदले में पूर्ण आस्था और विश्वास चाहते हैं ।

बिना आस्था और विश्वास के साधना क्षेत्र में सफलता प्राप्त संभव नहीं है ।

क्योंकि इसके मूल विश्वास काम करता है ।

इसके लिए योग्य पात्र का चुनाव अत्यंत आवश्यक है ।

जो युवक शिष्य बनना चाहते है ।

उस शिष्य को सेवाभावी होना चाहिए ।

शिष्य के मन में मानवीय मूल्य पूर्णरुप से विद्यमान होना चाहिए 

शिष्य सेवा करता रहें परन्तु काफी समय व्यतीत होने के बाद भी शिष्य की सेवा भावना में न्युनता न आवे ।

गुरुदेव के लिए सभी शिष्य सामन होते हैं ।

गुरुदेव के मन में शिष्य के प्रति किसी भी प्रकार का कोई भेद नहीं होता हैं ।

शिष्य को अपने प्रति गुरुदेव को यह विश्वास दिलाना चाहिए कि मैं इस कार्य के लिए सर्वथा योग्य हूं 

और आगे के जीवन में भी एक सच्चा तथा योग्य शिष्य सिद्ध हो सकूंगा ।

गुरुदेव तो अपना ज्ञान प्रत्येक शिष्य को देने के लिए आतुर होते ही हैं ।

परंतु यह भी तो देखा जाता है कि सामने वाला शिष्य इस ज्ञान को प्राप्त करने में सक्षम भी या नहीं जिस झोली में ज्ञान डाला जा रहा है ।

वह झोली अपने आप में मजबूत हैं ।

आपका मार्गदर्शक आपके पूज्य गुरुदेव ,

[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]

संपूर्ण भारतवर्ष 

संपर्क सूत्र:-6396372583,

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