सियासी घमासान: राहुल का ‘तानाशाही’ पर वार,केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने ‘देशद्रोह’ वाले बयान पर किया पलटवार
मुकेश कुमार-स्टेट हेड
नई दिल्ली:भारतीय राजनीति में एक बार फिर शब्दों के बाणों ने सियासी पारे को गरमा दिया है।ट्रेड डील और युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को लेकर राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के बीच छिड़ी इस ‘जुबानी जंग’ ने लोकतंत्र और विरोध की सीमाओं पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।राहुल गांधी का हमला: ‘तानाशाही प्रवृत्ति के खिलाफ बब्बर शेरों की आवाज’
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की निंदा की।उन्होंने इस कार्रवाई को “तानाशाही प्रवृत्ति” का परिचायक बताया।
मुख्य आरोप:राहुल गांधी ने अमेरिका के साथ हुई हालिया Trade Deal पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि इस समझौते से भारतीय किसानों और टेक्सटाइल उद्योग को भारी नुकसान होगा।साथ ही,उन्होंने भारत के डेटा की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई।
कार्यकर्ताओं का समर्थन: कार्यकर्ताओं को “बब्बर शेर” संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन भारत की लोकतांत्रिक धरोहर है।उन्होंने प्रधानमंत्री को ‘COMPROMISED PM’ कहते हुए आरोप लगाया कि सरकार अपनी खामियां छिपाने के लिए विपक्ष की आवाज दबा रही है।
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह का करारा जवाब: ‘विपक्ष ने पहना है गलत चश्मा’
राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार करने में देरी न करते हुए केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने इसे देश की छवि बिगाड़ने की साजिश करार दिया।उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जानबूझकर देश के विकास को नजरअंदाज कर रहे हैं।
प्रतिष्ठा का सवाल: केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने विशेष रूप से AI समिट के दौरान हुए प्रदर्शनों पर आपत्ति जताई।उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश की छवि धूमिल करना किसी भी सूरत में जायज नहीं है।
माफी की मांग: उन्होंने इन विरोध प्रदर्शनों को "देशद्रोह" की श्रेणी में रखते हुए कहा कि राहुल गांधी को अपनी इस सोच और देश की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाले बयानों के लिए
माफी मांगनी चाहिए।
