ब्यूरोचीफ शैलेन्द्रसिंह बारडोली गुजरात
जयेश भाई सोमपुरा केवल प्रतिमा शिल्पी नहीं बल्कि जिंदा भगवानों में संस्कारों सिंचन करनेवाले इंसान है।
सुरत जिलेकी बारडोली नगरसरदार वल्लभभाई पटेल की कर्मभूमि बारडोली कीआज पूरे विश्वमे एक भारत देशको आजाद होनेकी अलग पहचानहै
वहापर आई सोसायटी में करीब दोसो घर विविध प्रांतोंके परिवारो रहते हैं। जब सोसायटी का निर्माणकार्य शुरूहुआ तब सप्तश्रृंगी सोसाइटी का नामकरण सौराष्ट्र के निवासी जयेश भाईने किया था।
समय बीतते दक्षिण गुजरात के महुवा नगर में बसे वहासे जयेश भाई ने मंदिर निर्माण के व्यवसाय से जुड़े वक्त गुजरते समय के साथ उनकी किस्मत के सितारे चमके ओर बड़े देवालयोके निर्माण कार्य करने का मौका कुदरतने दिए।
सोमपुरा जो विविध धार्मिक संगठनो के पदाधिकारी है और दक्षिण गुजरात के जाने-माने समाज अग्रणी समाज सेवक यह सोसाइटी में अपने परिवार के साथ रहने के लिए निवास खरीदा तबसे उन्होंने अपनी कर्मभूमि बारडोली को बनाया।
जयेश भाई सोमपुरा के अलग सेवाभावी व्यक्तित्व सादगी से भरा जीवन व्यतीत करना अपना एक जीवन मंत्र बना लिया।
इन्होंने अपनी मनुष्य जीवन जीने की अपनी एक अलग पहचान बनाई।जबसे अपने परिवार के साथ यह सोसाइटी में रहते है तबसे इन्होंने पुरी सोसाइटी में रहने वाले परिवारों को अपना परिवार समझ के अपनी मानव धर्मकी सेवा कार्य करते परिवार के साथ सोसाइटी में रहते है।
सप्तश्रृंगी सोसाइटी में जबसे रहते है तबसे उनके नित्यक्रम मे सुबह पांच उठकर सोसाइटी में स्वच्छता अभियान खुद करते हैं।
स्वच्छता को अपना स्वयं धर्म मानकर दश सालसे भी अधिक समय से आजभी स्वच्छता कर्म निभा रहे है।उनकी सेवा को देखके दुसरे लोगोने स्वयं की सेवा स्वच्छता अभियानसे अपनेआप सोसाइटी में रहने वाले जुड़गए।
अधिक से अधिक लोग आज सेवाभावी जागृत नागरिक अपनी फर्ज खुद बजाके जिम्मेवारी को स्वीकार करलिया जो आम लोगों केलिए एक स्वच्छ पथपर चलने की नईराह दिखानेमे एक महत्वपूर्ण योगदान रहा।
यह सम्माननीय कार्य देखके बारडोली तहसील के भिन्न भिन्न सोसाइटी से लोग यहां पर स्वच्छता अभियान की प्रेरणा लेने आते हैं।
साथ साथ पुरी सोसाइटी में रहते युवाधन कोई व्यसन के मार्गपर नहीं जाए उस बातको लेके चिंतित रहते है साथ युवा वर्गमे कर्मनिष्ठा ओर संस्कारके सिंचन करते है ऐसे कार्योसे जयेश भाई बगिया के मालीके रूपमे उभरकर उनके निस्वार्थ भावके कार्योसे सामने आते है।

