*रेहान ख़ान रिपोर्टर फर्रुखाबाद 9452755077*
*रोजा मोमिनों पर फर्ज और तरावीह पढ़ना सुन्नत, हाजी बिलाल अहमद*
फर्रुखाबाद : मस्ज़िद जान अली खां सेक्रेटरी हाजी बिलाल अहमद साहब ने बताया कि रमजान का पाक महीना रोजेदारों शिद्दत के साथ सुबह सेहरी खाकर दिनभर रोजा रख शाम इफ्तार करते हैं वही पांच वक्त की नमाज के अलावे खास नमाज तरावीह भी पढ़ रहे हैं। मस्ज़िद जान अली खां सेक्रेटरी हाजी बिलाल अहमद साहब ने कहा कि रमजान माह में रोजे मोमिनों पर फर्ज हैं और तरावीह पढ़ना सुन्नत है।रमजान के महीने में की जाने वाली इबादतों से खुश होकर अल्लाह अपने बंदों पर बरकतों और रहमतों की बौछार करता है। तरावीह पूरे महीने पढ़ने से ही मुकम्मल सवाब मिलता है। रमजान वह मुकद्दस महीना है, जिसमें इंसान ग्यारह महीनों में किए गए गुनाहों को इबादत के जरिए माफ करा सकता है। रमजान के तीनों अशरों और तरावीह की खास अहमियत है। रमज़ान के महीने में ज्यादातर लोग अपने माल की जकात अदा करते हैं, जिससे गरीब, कमजोर और बीमार की मदद होती है। इसी तरह रमजान में सदका-ए-फित्र (रमजान के महीने में दिया जाने वाला दान) भी अदा करना जरूरी होता है। यह रोजेदार को बुरी बातों से पाक करता है।

