गुरुदेव की कृपा से उलझनों से पार जाने की शक्ति मिलती है :आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
ब्यूरो रिपोर्ट TTN 24 NEWS
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"सादर जय सियाराम"
🌹"आध्यात्मिक यात्रा"🌹
आज समय की मांग है जो पुनः ऐसे ही गुरु परंपरा पर जोर देने की आवश्यकता है ।
जिससे हमारे सनातन संस्कृति में विश्व की एक नई दिशा और दशा देने की क्षमता जगे समर्थ सदगुरू से मानवता लहलहा उठें विश्व भर से छोटे-बड़े अमीर-गरीब पिछड़े विकासशील और अविकसित का भेद मिटे नियता के इस संपूर्ण मंगल का संकल्प गुरु ऋषियों के सद प्रयास से ही संभव होगा हम अपने पूज्य गुरुजनों के लिए श्रद्धाभावना को अपने अंत:करण में जगाये यही इस युग की आवश्यकताओं में से एक आवश्यकता ये भी है ।
भारत को विश्व गुरु का गौरव मिला , पूज्य गुरुदेव भगवान के कृपा से हमारे भाग्य का निर्माण होना शुरू होता है ।
और अंदर दुःख दरिद्र निकलने शुरू होता है ।
इस प्रकार शिष्य के कर्म प्रारब्ध एवं परमात्मा के विधान के बीच गुरुदेव बादल बनकर शुभ पुण्य फल बरसाता है ।
जब भाग्य की जड़ों में गुरु एक-एक बूद कृपा गिराता है ।
तो शिष्य की भाग्य की खेती लहलहाने लगती है ।
सौभाग्य धन-वैभव ऐश्र्वर्य के फल जीवन में लग जाते है ।
सदियों से ऐसी ही गुरु शिष्य परम्परा के बल पर मानवता धन्य होती रहती है ।
गुरुदेव के द्वारा शिष्य को जो भी प्राप्त होता है ।
तृण भी अमृत के समान मानकर स्वीकार करना चाहिए ।
गुरुदेव की कृपा से ही जीवन में शिष्य उलझनों से सुलझता है ।
गुरुदेव की कृपा से उलझनों से पार जाने की शक्ति मिलती है ।
गुरुदेव अपने शिष्य को अपना प्रतिबिंब मानकर उसमें संस्कार उतारने में मदद करता है ।
गुरुदेव अपने तपोबल से शिष्य के पिछले जन्मों को दिव्य दृष्टि डालकर खंगालता है ।
और धरा पर उसकी नई भूमिका का मार्ग प्रशस्त करने में भूमिका निभाता है ।
पूर्व के संस्कारों के साथ शिष्य की गहराई जानना उसकी चेतनात्मक भूमि को समझना और आगे के जीवन का विस्तार तय करना गुरुदेव का महत्वपूर्ण कार्य है ।
पद्मपुराण कहता है कि ,
"तीर्थेषु लभ्यते साधू रामचंद्रपरायण: ।
यद्दर्शनं नृणां पापराशिदाहा शुशुक्षणि: ।।"
आध्यात्मिक साधना के क्षेत्र में प्रगति गुरुदेव के प्रत्यक्ष सहयोग बिना असंभव है ।
गुरुदेव वो होते है , जो हमें अज्ञान से ज्ञान की ओर ले चले , सत्पथ-सुपथ , स्वस्ति पथ पर ले चलें उसे ही गुरु कहा जाता है ।
साधना ही नहीं अपितु जीवन के हर पथ में गुरु वरण करने की आवश्यकता होती है ।
गुरुदेव शिष्य को संकटों के बीच से निकालता है ।
दृष्टांत में रामजी और लक्ष्मणजी भी पूज्य गुरुदेव भगवान विश्वामित्र वशिष्ठ जी के मार्गदर्शन से ही समर्थ बने महाभारत की सफलता भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन के मिलन से ही संभव हुई
संसार में प्रत्येक व्यक्ति को गुरु की आवश्यकता पड़ती है ।
गुरुदेव के मार्गदर्शन से शिष्य की आगामी जीवन यात्रा सफल हो जाती है ।
आपका मार्गदर्शक आपके पूज्य गुरुदेव ,
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
गुजरात प्रदेश
संपर्क सूत्र:-6396372583,
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