जमुई:जेडीयू जिलाध्यक्ष चुनाव से पहले सियासी सरगर्मी,शैलेंद्र महतो के खिलाफ 'पुरानी फाइलों' के जरिए घेराबंदी की कोशिश?
टीटीएन 24 न्यूज ब्यूरो
जमुई(बिहार)।जैसे-जैसे जमुई में जेडीयू जिलाध्यक्ष के चुनाव की तारीख(1मार्च)नजदीक आ रही है,जिले का सियासी पारा चढ़ने लगा है।एक तरफ जहां वर्तमान जिलाध्यक्ष शैलेंद्र कुमार महतो अपने मजबूत संगठन और जमीनी पकड़ के दम पर दोबारा कमान संभालने की तैयारी में हैं,वहीं दूसरी ओर कुछ कतिपय हलकों और मीडिया के एक वर्ग द्वारा वर्षों पुराने मामलों को हवा देकर उनकी छवि धूमिल करने की कवायद शुरू कर दी गई है।संगठन की मजबूती बनाम विवादों का शोर
शैलेंद्र कुमार महतो का कार्यकाल जमुई में जेडीयू के लिए काफी सक्रिय रहा है।राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने जिले के सुदूर क्षेत्रों तक संगठन का विस्तार किया और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखा।ऐसे समय में जब पार्टी को उनके नेतृत्व का लाभ मिल रहा है,संगठन चुनाव के ठीक पहले पुराने मामलों को उखाड़ना कई सवाल खड़े करता है।
क्या यह सोची-समझी रणनीति है?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जिलाध्यक्ष चुनाव में शैलेंद्र महतो की मजबूत दावेदारी से घबराकर कुछ विरोधी तत्व मीडिया के माध्यम से 'नेगेटिव नैरेटिव' सेट करने का प्रयास कर रहे हैं।वर्षों पुराने केस,जिनका वर्तमान सांगठनिक कार्यक्षमता से कोई लेना-देना नहीं है,उन्हें मुख्य विमर्श बनाना स्वस्थ लोकतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता के सिद्धांतों पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
मुख्य बिंदु:
1 मार्च को चुनाव: संगठन के भीतर की गुटबाजी अब सार्वजनिक चर्चा का विषय बन रही है।
कार्यकर्ताओं का समर्थन:
जिले के अधिकांश सक्रिय कार्यकर्ताओं का मानना है कि शैलेन्द्र महतो के कार्यकाल में संगठन को नई धार मिली है।
छवि बिगाड़ने का प्रयास:
पुराने मामलों को आधार बनाकर उनकी उम्मीदवारी पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।
गौरतलब हैं कि किसी भी नेता की योग्यता का पैमाना उसके द्वारा किए गए सांगठनिक कार्य और कार्यकर्ताओं के बीच उसकी लोकप्रियता होनी चाहिए।संगठन चुनाव से ऐन पहले व्यक्तिगत प्रहार या पुराने मामलों को तूल देना यह दर्शाता है कि मुकाबला अब विकास और संगठन के मुद्दों से हटकर चरित्र हनन की ओर मुड़ रहा है।अब देखना यह है कि जेडीयू के आलाकमान और जिला स्तरीय प्रतिनिधि इन प्रायोजित विवादों से प्रभावित होते हैं या शैलेंद्र महतो के 'संगठन प्रेम' पर अपना भरोसा बरकरार रखते हैं।
