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छिंदवाड़ा: अन्नदाता के लिए चिंतित है इसीलिये 2003 में बेहतर बाजार व मार्गदर्शन की व्यवस्था की

 मध्य प्रदेश छिंदवाड़ा से मनीष इंगोले की रिपोर्ट। 


 कमलनाथ व नकुलनाथ ने किसानों को खोखले वादे नहीं, टिकाऊ कृषि व आधुनिक तकनीक दी


अन्नदाता के लिए चिंतित है इसीलिये 2003 में बेहतर बाजार व मार्गदर्शन की व्यवस्था की

संसदीय क्षेत्र छिन्दवाड़ा के आधे से अधिक गांव तक फैला है आईटीसी का मजबूत सम्पर्क

सब्जी, फूल,फल और अनाज उत्पादक किसानों को तकनीक के साथ ही बाजार भी उपलब्ध कराए

छिन्दवाड़ा। खेत और किसान देश की रीढ़ है यह बात मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ एवं जिले के पूर्व सांसद नकुलनाथ भली भांति जानते हैं। इसीलिये उन्होंने कभी भी किसानों से खोखले वादे नहीं…टिकाऊ कृषि व आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराई। छिन्दवाड़ा संसदीय क्षेत्र के किसानों को पारम्परिक खेती से दूर सब्जी, फल व फूलों के साथ ही उन्नत अनाज की खेती की तरफ मोड़ा। अन्नदाता को मार्गदर्शन और बेहतर बाजार आईटीसी के माध्यम से उपलब्ध कराया। परिणामस्वरूप आज छिन्दवाड़ा व पांढुर्ना जिले के आधे से अधिक गांव व किसानों के बीच आईटीसी की मजबूत टीम और सम्पर्क अन्नदाता का मार्गदर्शन, उन्नत किस्म के बीज और बाजार सबकुछ उपलब्ध करा रहे हैं।

खेती को लाभ का धंधा बनाने के साथ ही अन्नदाता को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए हमेशा ही चिंतित रहने वाले मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ एवं जिले के पूर्व सांसद नकुलनाथ के अथक व सतत प्रयासों से छिन्दवाड़ा जिले में आईटीसी किसानहित में 2003 से कार्य करते हुए किसान भाइयों के विकास में योगदान दे रही। सबसे खास बात यह कि 8 ब्लॉकों में 63 ई-चौपाल का सम्पर्क है जो सीधे तौर पर 562 गांव तक पहुंच है। इतना ही नहीं 12 निगमित और 7 मौजूदा (FPO) किसान उत्पादक संगठन का सम्पर्क मौजूद है। कमलनाथ एवं नकुलनाथ ने पहले सोयाबीन फिर मक्का की खेती से जोड़कर किसानों को आर्थिक रूप से मजूबत किया। इतिहास गवाह है कि कि नेताद्वय के कार्यकाल में मक्का उपज के भाव कभी बेभाव नहीं हुए। गिरते हुए दामों पर चिंता व्यक्त की और किसान हित में आंदोलन व धरना प्रदर्शन कर किसान भाइयों के लिए मक्का उपज का समर्थन मूल्य मांगा किन्तु सरकार नहीं जागी। किसानों व सप्लायर्स के माध्यम से की बम्पर खरीदी

कमलनाथ एवं नकुलनाथ के प्रयासों से स्थापित आईटीसी ने किसानों एवं सप्लायर्स के माध्यम से गेहूं एवं मक्का उपज की निर्धारित मूल्य पर बम्पर खरीदी की। वर्ष 24-25 में 7,000 हजार किसान भाइयों से 9,000 मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की। इसी तरह वर्ष 25-26 में 10,000 किसानों से 15,000 मिट्रिक टन गेहूं की खरीदी की गई। वर्ष 24-25 में 9,000 सप्लायर्स से 7,000 मिट्रिक टन एवं वर्ष 25-26 में सप्लायर्स से 8,000 मिट्रिक टन उपज की खरीदी कर आईटीसी ने किसानों को मजबूत बाजार उपलब्ध कराया। हजारों किसान ले रहे तकनीकी प्रशिक्षण

बाजार…उत्तम.. किस्म के बीज ही नहीं बल्कि किसानों को तकनीकी रूप से दक्ष करने में जुटी आईटीसी ने विगत 3 र्षों में 224 कार्यक्रमों का आयोजन कर जिले के लगभग 4,000 किसानों को प्रशिक्षित किया। कमलनाथ एवं नकुलनाथ की मंशा अनुरूप आईटीसी सतत रूप से किसानों को आधुनिक कृषि का प्रशिक्षण दे रहे हैं। आईटीसी ने वर्ष 2006 में छिन्दवाड़ा में “चौपाल सागर” की स्थापना की जो किसान प्रशिक्षण जैसी सेवाएं उपलब्ध कराता है, यह हर वर्ष 50,000 से अधिक किसानों को लाभ देता है। नई पीढ़ी के लिए नई शुरुआत

आईटीसी ने कृषि के बदलते दौर और युवा पीढ़ी के कृषि में रुझान को देखते हुए आईटीसी ने नवीन शुरुआत की है। (ITCMAARS) एप शुरू किया है, जो किसानों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल और उच्च उपज देने वाली फसल किस्मों के बारे में जानकारी प्रदान करता है। यह एप 19 एफपीओ पर शामिल है। 5 (FPO) किसान उत्पादक संगठन को (SFAC) लघु किसान कृषि व्यवसाय संघ से अनुदान, दो वर्षों में 25,000 मिट्रिक टन उपज की खरीद, किसानों को 4 करोड़ रुपए के प्रमाणित बीज एवं 50 लाख रुपए के कृषि व रसायन उपलब्ध कराने का नया रिकॉर्ड कायम किया है। यही नहीं किसान हित में आईटीसी के द्वारा किसानों को जागरू करने हेतु 881 लेख 530 सलाहकारी वीडियों और 3 हजार से अधिक मिट्टी परीक्षण परिणाम है।

टिकाऊ कृषि व आधुनिक तकनीकों का प्रयोग कर रही आईटीसी

कमलनाथ एवं नकुलनाथ की मंशानुसार आईटीसी टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक तकनीकों का प्रयोग कर रही है। जिसमें 8 गांव में 400 से अधिक चौपाल प्रदर्शन, 111 गांव में गेहूं विकास कार्यक्रम संचालित हो रहा है। 500 से अधिक किसानों की भागीदारी इसमें सुदृढ करता है। इसीलिये कहा जाता है कि कमलनाथ एवं नकुलनाथ कल भी किसानों के साथ थे, आज भी डटकर किसानों के साथ है और आगे भी सबसे आगे किसानों के साथ खड़े रहेंगे।

चिप्स वाले आलू की खेती बनी आधार

जिलेभर में बड़े स्तर पर चिप्स वाले आलू की खेती किसान भाइयों के लिए स्थाई व मजबूत आय का आधार बना। चिप्स वाली खेती की शुरुआत सर्वप्रथम आईटीसी के द्वारा की गई थी, जिससे जिलेभर के किसान लाभांवित हो रहे हैं। किसानों को निश्चित दर पर बीज उपलब्ध कराने के साथ ही एक निश्चित मूल्य पर खरीदी का समझौता आसानी से बाजार की उपलब्ध करता है। आज भी जिले के किसान आलू की खेती के लिए आईटीसी पर भरोसा जताते हैं।

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