नगर पालिका बिलग्राम में टकराव 16 सभासदों ने किया कार्य बहिष्कार,।
चन्दगीराम मिश्रा
हरदोई यूपी
बिलग्राम हरदोई नगर पालिका की बोर्ड बैठक अब महज औपचारिकता नहीं, बल्कि कानूनी और राजनीतिक टकराव का अखाड़ा बन चुकी है। 9 सभासदों ने उपस्थिति दर्ज कराई, जबकि 16 सभासदों ने बैठक का बहिष्कार कर साफ संदेश दिया कि 31 बिंदुओं की शिकायत पर ठोस कार्रवाई के बिना कामकाज स्वीकार नहीं होगा।सभासदों का आरोप है कि शिकायत पत्र जिलाधिकारी हरदोई को सौंपा गया था, जिसकी जांच उप जिलाधिकारी बिलग्राम एन. राम को दी गई, लेकिन अब तक परिणाम शून्य है। ऐसे में अब सवाल सीधे कानून और जवाबदेही पर खड़े हो रहे हैं। क्या 31 बिंदुओं की शिकायत पर समयबद्ध जांच न करना प्रशासनिक लापरवाही की श्रेणी में नहीं आता.?? क्या जांच लंबित रहते हुए बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित करना विधिक रूप से चुनौती योग्य नहीं है.?? क्या सभासदों को शिकायत की प्रगति रिपोर्ट जिला अधिकारी महोदय को न देना पारदर्शिता का उल्लंघन नहीं है.?? यदि वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं, तो क्या लेखा परीक्षण (ऑडिट) अनिवार्य नहीं होना चाहिए.?? क्या बहुमत के विरोध के बावजूद निर्णय लेना लोकतांत्रिक मूल्यों और नगर पालिका अधिनियम की भावना के खिलाफ नहीं है.??
बैठक में नगर पालिका अध्यक्ष व अधिशासी अधिकारी नीलाव शाल्या की मौजूदगी के बावजूद हालात नियंत्रण में नहीं दिखे। 16 सभासदों ने साफ कहा है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो वे आमरण अनशन करेंगे। अब सवाल यह है क्या बिलग्राम नगर पालिका जनता के प्रति जवाबदेह है या सिर्फ सत्ता संतुलन का मंच बनकर रह गई है.?? प्रशासन की चुप्पी जितनी लंबी होगी, कानूनी संकट उतना गहराएगा।
