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चिरमिरी में खुलेआम पहाड़ों का कत्ल, राजस्व खनिज की चोरी, प्रशासन मौन

 विनोद कुमार पांडे ब्यूरो चीफ


चिरमिरी.में खुलेआम पहाड़ों का कत्ल, राजस्व खनिज की चोरी, प्रशासन मौन

**एसडीएम–तहसीलदार की नाक के नीचे महीनों से अवैध मिट्टी खनन,

“मैं देखता हूँ” कहते-कहते पूरा पहाड़ काट दिया गया**

चिरमिरी के हल्दीबाड़ी वार्ड क्रमांक 12, काली मंदिर से बड़ी बाजार पहुंच मार्ग के पुराने रास्ते पर कई महीनों से अवैध मिट्टी खनन का गोरखधंधा खुलेआम जारी है। आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि ना कोई रोक-टोक, ना कोई जांच और ना ही कोई ठोस कार्रवाई अब तक देखने को मिली।

यह पूरा अवैध कारोबार एसडीएम, तहसीलदार, जिला प्रशासन और जिला खनिज विभाग की नाक के नीचे लगातार चलता रहा। इससे पहले भी समाचारों के माध्यम से प्रशासनिक अधिकारियों को जगाने का प्रयास किया गया, लेकिन हर बार नतीजा सिर्फ आश्वासन और मौन तक ही सीमित रहा।

“मैं देखता हूँ” — और देखते-देखते पहाड़ ही काट दिया

कवरेज के दौरान जब चिरमिरी एसडीएम को मौके की स्थिति से अवगत कराया गया, तो उनका जवाब था —

“मैं देखता हूँ।”

लेकिन इस “देखने” की अवधि में अवैध खननकर्ताओं ने पूरा पहाड़ ही छलनी कर दिया। निकाली गई मिट्टी को बड़ी बाजार क्षेत्र के ईंट-भट्ठों में खुलेआम खपाया जा रहा है।

कवरेज के समय यह अवैध मिट्टी खनन कई घंटों से लगातार चल रहा था। प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क साधने के बावजूद कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर कार्रवाई करने नहीं पहुंचा, जबकि तब तक कई ट्रैक्टर मिट्टी निकाल चुके थे।

यह स्पष्ट करता है कि यह खेल एक दिन का नहीं बल्कि कई महीनों से संगठित रूप से चल रहा है, जिसकी जानकारी प्रशासन को पहले से थी।

हवा में लटकते पेड़, पहाड़ बना खदान

अवैध खनन के कारण आज हालात यह हैं कि कई स्थानों पर पेड़ हवा में लटकते नजर आ रहे हैं।

पूरा इलाका सुरंग और खदान में तब्दील कर दिया गया है।

कई बड़े पहाड़ों का हिस्सा पूरी तरह काट दिया गया, लेकिन एक बार भी प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर काम रुकवाने की जरूरत नहीं समझी।

ट्रैक्टरों से खुलेआम परिवहन

बंद पड़ी मार्ग और मुख्य सड़कों से ट्रैक्टरों के माध्यम से लगातार मिट्टी ढोई जा रही है।

दिन-रात ट्रांसपोर्टिंग जारी है, लेकिन न चेकिंग, न परमिट जांच, न कोई कार्रवाई।

ऐसा प्रतीत होता है कि सब कुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है।

कानून क्या कहता है? – अवैध मिट्टी खनन पर कार्रवाई का प्रावधान

भारत में मिट्टी, मुरूम, गिट्टी आदि माइनर मिनरल की श्रेणी में आते हैं।

इनका अवैध खनन होने पर निम्न कानून लागू होते हैं —

खनिज एवं खनन (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 (MMDR Act)

धारा 4(1A) – बिना अनुमति खनन अपराध

धारा 21 – जुर्माना, वाहन जब्ती और जेल का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता (IPC)

धारा 379 – चोरी

धारा 411 – चोरी का माल रखने पर अपराध

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986

पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने पर कार्रवाई

भारी जुर्माना और कार्य बंद कराने का अधिकार

सरकारी भूमि हो या निजी भूमि —

 बिना वैध अनुमति मिट्टी खनन पूरी तरह अवैध है।

निजी भूमि पर भी खनिज विभाग की अनुमति और रॉयल्टी भुगतान अनिवार्य होता है।

एसडीएम, तहसीलदार और खनिज विभाग की जिम्मेदारी क्या बनती है?

एसडीएम

अवैध खनन पर तत्काल छापेमारी

कार्य बंद कराने और एफआईआर दर्ज कराने का अधिकार

तहसीलदार

राजस्व भूमि की सुरक्षा

अवैध खनन पर पंचनामा और जब्ती

जिला खनिज अधिकारी

रॉयल्टी चोरी की जांच

वाहन, मशीन और खनिज जब्त कर जुर्माना

जिला प्रशासन / कलेक्टर

पूरे मामले की मॉनिटरिंग

संयुक्त टीम बनाकर सख्त कार्रवाई

पत्रकार की सूचना पर तत्काल कार्रवाई अनिवार्य

यदि कोई मान्यता प्राप्त पत्रकार या समाचार पत्र प्रशासन को अवैध खनन की सूचना देता है, तो —

प्रशासन की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी बनती है कि

तत्काल मौके पर टीम भेजी जाए

कार्य बंद कराया जाए

स्पष्ट कार्रवाई सार्वजनिक की जाए

ताकि आम जनता को यह भरोसा मिल सके कि प्रशासन निष्पक्ष और सक्रिय है।

जवाब टालने वाले अधिकारी, बढ़ते सवाल

जब चिरमिरी तहसीलदार से संपर्क किया गया, तो जवाब मिला —

“मैं बाहर हूँ।”

वहीं एमसीबी जिला कलेक्टर राहुल वेंकेट से कई बार संपर्क करने पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

अब शहर में यह मामला जन-चर्चा का विषय बन चुका है। लोग पूछ रहे हैं —

क्या प्रशासनिक अधिकारी दबाव में हैं?

क्या राजस्व की खुली चोरी करवाई जा रही है?

क्या वोट बैंक के लिए अवैध कारोबारियों को खुली छूट है?

समय रहते नहीं रुका तो भारी पड़ेगा

यदि चिरमिरी में चल रहे इस अवैध मिट्टी खनन के सांप को समय रहते नहीं कुचला गया, तो आने वाले समय में

पर्यावरण, प्रशासन और सरकार — तीनों को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।

अब देखना यह है कि —

प्रशासन जागता है या यह

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