हरदोई मल्लावां भागवत कथा में पं, सतीश त्रिपाठी ने बताया कि जीवात्मा से परमात्मा का मिलन ही सच्चा महारास है।
चन्दगीराम मिश्रा
हरदोई यूपी
मल्लावां हरदोई नगर के मोहल्ला श्यामपुर में विकास त्रिवेदी सोमू के आवास पर सुनाई जा रही श्रीमद भागवत कथा के छठवें दिवस में विख्यात कथावाचक पंडित सतीश त्रिपाठी ने मानव जीवन की गरिमा का महत्व बताते हुए कहा कि मनुष्य संसार में व्यवहार, व्यापार , परिवार में भटका करता है एवं सुख की प्राप्ति हेतु प्रयत्न करता रहता है, किन्तु यह संसार असार है दुखालय है। यहाँ कहीं भी सुख नहीं है। सच्चा सुख परमात्मा के चरणों में ही है। अतः मानव को अपनी सम्पूर्ण वृत्ति भगवत चरणों में लगा देनी चाहिए। प्रत्येक इन्द्री के द्वारा भगवान का भजन होता रहे। भगवत शरणापन्न होकर जीवन यापन करना चाहिए।जीवात्मा-परमात्मा जब दोनो एक हो जाते हैं तब जाकर वास्तविक महारास धारण होता है।भगवान कृष्ण के द्वारा की गई रासलीला सही अर्थों में काम विजय लीला है। भगवान ने काम को पराजित करने के लिए यह लीला रचाई। कृष्ण ब्रह्म है, गोपी जीव है। जीवात्मा परमात्मा का विलास ही सच्चे अर्थों में महारास है। गोवर्धन लीला का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि भगवान ने भक्तों का मान बढ़ाया भी है और अहंकार हो जाने पर घटाया भी है। भगवान ने देवराज इंद्र का मान मर्दन करते हुए गोप ग्वालों से गिरिराज जी की पूजा कराई और पर्यावरण व प्रकृति का संरक्षण का सीधा संदेश दिया। गिरिराज पूजन से हम सभी को संकल्प लेना चाहिए कि हर प्रकार से इस पृथ्वी पर वनस्पतियों और पर्यावरण संरक्षण का प्रयास करते रहें। कथा में आचार्य सज्जन द्विवेदी द्वारा मूल पाठ किया गया और संगीत टोली के विकास द्विवेदी, शुभम शास्त्री व शिवम अवस्थी ने कई भजनों को प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध किया।इस मौके को शांति सत्संग मंच श्यामपुर के संयोजक प्रकाश चन्द्र गुप्ता , कथा परीक्षित विकास त्रिवेदी सोमू , आयोजक धीरज अग्निहोत्री , विजय त्रिपाठी ,अवध बिहारी शास्त्री,वीरेंद्र शुक्ला, गिरिजा शंकर अग्निहोत्री , चन्द्र देव अग्निहोत्री , कमला शुक्ला , मनोज अग्निहोत्री पुतानी, अरुण शुक्ला पटेल, अनिल शुक्ला,विनीत त्रिपाठी, राजबहादुर वर्मा सहित सैकड़ो की संख्या में गणमान्य भक्तगण उपस्थित रहे। छठवें दिन कार्यक्रम के समापन पर आयोजक विकास त्रिवेदी सोमू व धीरज अग्निहोत्री ने प्रसाद वितरण के साथ में सभी का आभार व्यक्त किया।


