हरदोई बिलग्राम नगर पालिका के निर्माण कार्यों में घोटाले का आरोप, सभासदों ने डीएम हरदोई से की उच्चस्तरीय जांच की मांग।
चन्दगीराम मिश्रा
हरदोई यूपी
बिलग्राम हरदोई,बिलग्राम नगर पालिका परिषद में निर्माण कार्यों में व्यापक अनियमितताओं, नियमों की अनदेखी और नगर पालिका अध्यक्ष की कथित अप्रत्यक्ष भूमिका को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। नगर पालिका के कई सभासदों ने जिलाधिकारी हरदोई अनुनय झा से मुलाकात कर एक विस्तृत लिखित शिकायती पत्र सौंपते हुए उच्चस्तरीय जांच समिति गठित कर समस्त प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है। सभासदों ने आरोप लगाया कि नगर पालिका अध्यक्ष द्वारा भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है, नियमों के विरुद्ध कार्य कराए जा रहे हैं तथा ठेकेदारों से मिलीभगत कर अपने रिश्तेदारों, मित्रों व उनके परिजनों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। शिकायत पत्र में कहा गया है कि नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा 86 के तहत प्रति माह बोर्ड बैठक बुलाना अनिवार्य है, किंतु बीते ढाई वर्षों में मात्र 7–8 बैठकें ही आयोजित की गईं, जिससे विकास कार्य बाधित हुए।शिकायत में नगर क्षेत्र में कराए गए कई निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। सभासदों के अनुसार डाकघर के पीछे शिव सिंह गेस्ट हाउस के पास बनी सड़क दो बार बनाई गई, फिर भी गुणवत्ता बेहद खराब है। कई सीसी और डामर सड़कों के निर्माण के कुछ ही महीनों में उखड़ जाने, घटिया सामग्री, रोलर व वाइब्रेटर का प्रयोग न किए जाने तथा नकली सीमेंट के उपयोग के आरोप लगाए गए हैं। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत शौचालय निर्माण में फर्जी कोटेशन, बिना कार्य कराए भुगतान, दोहरी निविदा प्रक्रिया और एमबी में खानापूर्ति का आरोप भी लगाया गया है। गौशाला में मिट्टी भराई के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग और बिना टेंडर पाइपलाइन व इंटरलॉकिंग कार्य कराए जाने का भी उल्लेख किया गया है।सभासदों ने आरोप लगाया कि अध्यक्ष द्वारा आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति में नियमों की अनदेखी कर अपने समाज व करीबी लोगों को लाभ पहुंचाया गया, जबकि पुराने कर्मचारियों को हटाया गया। इसके साथ ही अधिकारियों व कर्मचारियों पर नियम विरुद्ध भुगतान के लिए दबाव डालने, वेतन व ईपीएफ भुगतान में जानबूझकर देरी कर शोषण करने और अभिलेखों को घर पर रखे जाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।शिकायत पत्र में यह भी कहा गया है कि नगर पालिका अध्यक्ष के परिजनों की सरकारी कार्यों में दखलअंदाजी से कर्मचारियों में भय का माहौल है, जिससे कोई भी कर्मचारी खुलकर सच बोलने को तैयार नहीं है। सभासदों ने सभी बिंदुओं पर उच्च अधिकारियों की समिति से निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने पर अध्यक्ष, ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।सभासदों का कहना है कि जनता के टैक्स के पैसों से कराए गए कार्यों की स्थिति अत्यंत दयनीय है और यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह भ्रष्टाचार और गहरा जाएगा। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन द्वारा गठित की जाने वाली जांच समिति कितनी निष्पक्षता से जांच करती है और दोषियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाती है।