लोकेशन आलोट जिला संवाददाता डॉ सुनील चोपड़ा
ईश्वर सच्चा है और संसार नश्वर है, जीवन के लिए पुरुषार्थ करना भी जरुरी है: गुरुदेव संतश्री पं. कमलकिशोरजी
ईश्वर सच्चा है और संसार नश्वर है, जीवन के लिए पुरुषार्थ करना भी जरुरी है तो परमात्मा का ऋण भी चुकाना भी नही भूलना है, यही ज्ञान और स्मरण भागवत महापुराण कराती है और मोक्ष भी दिलाती है। इसलिए दुनिया के साथ-साथ भगवान से भी नाता जोड लीजिए ।यह बात मालव माटी के गुरुदेव संतश्री पं. कमलकिशोरजी नागर ने आलोट से करीब 18 किलोमीटर दूर बडौद रोड पर स्थित श्रीकृष्ण गौशाला परिसर में ग्राम माल्या के ग्रामवासीयों व्दारा आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा वाचन के सातवें दिन सोमवार को कथा विश्रांति के दौरान कही। उन्होंने कहा कि जैसे हम तीर्थ या कथा आदि स्थलों पर पहुंचते और वहां आपस में मिलते है तो एक अनजान से भी नाता जोड लेते है, वैसे ही राम से संबंध जोड़ने का प्रयास करना चाहिए। ब्रज की राधा ने व्दारकाधीश से संबंध जोडा, वहां सभी राधे राधे बोलते है, मीरा ने संबंध जोडा था और विष का प्याला नृत्य करते पी लिया था ।
परमात्मा की कृपा, अनुदान से मनुष्य शरीर मिला है जो अनमोल है और शरीर की रचना भी सुंदर की है जो कोई नही कर सकता। उन्होंने कहा कि धन नुकसान करता है, धन से वंश डूबोता है । बडे धनी के पास घर-परिवार, जायदाद है लेकिन उनको बिमारी भी बडी लगती है और बेटे उन्हे बेचकर उडा देते है, ऐसे में मेहनत-मजदूरी करने वाले गरीब व्यक्ति का जीवन सुखी है।
उन्होंने कहा कि पृथ्वी में जल है और खोदते खोदते हम पानी के निकट पहुंच जाते है, वैसे ही हम साधना, उपासना के जरिए खोजते खोजते परमात्मा के करीब पहुँचने का प्रयास जरुर करे। उन्होंने कथा मे विभिन्न प्रसंगो के साथ श्रीकृष्ण, सुदामा मिलन प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया और कहा कि मैने कथा और अनुभव के माध्यम से आपको हर तरह से समझाने का प्रयास किया है और परमात्मा से प्रार्थना करता हूं, आप सभी का जीवन सुख, शांतिमय बनाए । अच्छी बाते अवश्य आत्मसात कर लेने यही मेरी दक्षिणा और कथा की सार्थकता होगी। कथा के पूर्व बालसंत गोविंदजी ने प्रवचन दिए।
उल्लेखनीय है कि संतश्री व्दारा अलग-अलग 200 से अधिक स्थानों पर गौशालाएं शुरु की, कथा आयोजन के दौरान ग्राम माल्या के निवासीयों ने शराब, मांस का त्याग किया। कथा परिसर इतना बडा मैदान था कि जिसमें विशाल पांडाल, हजारों दो-चार पहिया, बसे, ट्रेक्टर ट्राली आदि वाहन खडे हुए और पांडाल मे महिला-पुरुष के बैठने की व्यवस्था अलग-अलग थी।
सर्दी का मौसम होने के बावजूद कथा में रात्रि विश्राम करने वाले श्रोताओं के लिए चाय-नाश्ते और भोजन की व्यवस्था थी और कथा में प्रतिदिन श्रोताओं की संख्या में लगातार इजाफा आखरी दिन तक होता रहा, विशाल जनसमूह को देखकर संतश्री ने आयोजकों से कहा कि संभावना से बडा आयोजन हुआ है यदि खर्च में राशि कम पडे तो निःसंकोच बता देना, मैं इसकी पूर्ति करुंगा।

