लोकेशन पटना बिहार रिपोर्ट नेशनल हेड एवं लीगल एडवाइजर अधिवक्ता राजेश कुमार की विशेष रिपोर्ट।
एंकर पटना हाई कोर्ट में न्यायाधीश आरपी मिश्रा ने रचा इतिहास: एक दिन में 510 जमानत मामलों का रिकॉर्ड निपटारा
पटना हाई कोर्ट ने हाल ही में एक ऐसा कारनामा किया है, जिसने न्यायिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। न्यायमूर्ति आरपी मिश्रा (जस्टिस रुद्र प्रकाश मिश्रा) की एकल पीठ ने उत्पाद एवं मद्य निषेध अधिनियम (बिहार शराबबंदी कानून) से संबंधित 510 जमानत मामलों की सुनवाई एक ही दिन में पूरी कर डाली। यह उपलब्धि न केवल पटना हाई कोर्ट बल्कि पूरे देश के न्यायिक इतिहास में एक मिसाल बन गई है।कैसे हुआ यह रिकॉर्ड?
सोमवार को न्यायमूर्ति आरपी मिश्रा की बेंच ने इन सभी मामलों को एक साथ सूचीबद्ध किया। प्रत्येक मामले की सुनवाई औसतन मात्र 30 सेकंड में पूरी की गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, इनमें से 90% से अधिक मामलों में जमानत याचिकाएं स्वीकृत कर दी गईं। जिन मामलों में वकील उपस्थित नहीं हुए, उन्हें अगली तारीख पर रख दिया गया। इस त्वरित प्रक्रिया से अदालत ने एक दिन में इतनी बड़ी संख्या में मामलों का निपटारा करके एक नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किया।
इस उपलब्धि का महत्व
लंबित मामलों का बोझ कम होगा: बिहार में शराबबंदी कानून के तहत हजारों जमानत याचिकाएं लंबित हैं। इस तरह की त्वरित सुनवाई से अदालतों पर बढ़ता दबाव कम होगा और न्याय वितरण प्रक्रिया तेज होगी।
जनता का विश्वास बढ़ेगा: आम जनता में यह धारणा रहती है कि अदालतों में मामले सालों तक लंबित रहते हैं। ऐसे में एक न्यायाधीश द्वारा इतनी बड़ी संख्या में मामलों का त्वरित निपटारा न्याय व्यवस्था की दक्षता और पारदर्शिता को दर्शाता है।
न्यायिक दक्षता की मिसाल: यह घटना दिखाती है कि उचित योजना और संसाधनों के साथ अदालतें बड़ी संख्या में मामलों का निपटारा कर सकती हैं, बिना न्याय की गुणवत्ता से समझौता किए।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ और मीडिया?
मीडिया रिपोर्ट्स में इसे 'सुपर एक्सप्रेस सुनवाई' करार दिया गया है। कई जगहों पर इसे राष्ट्रीय स्तर पर नया रिकॉर्ड बताया जा रहा है। यह घटना बिहार हाई कोर्ट के इतिहास में सबसे तेज डिस्पोजल में से एक है। हालांकि, कुछ लोग इसकी गति पर सवाल भी उठा रहे हैं, लेकिन अधिकांश इसे सकारात्मक कदम मानते हैं।
निष्कर्ष
न्यायमूर्ति आरपी मिश्रा की इस उपलब्धि ने साबित कर दिया कि भारतीय न्याय व्यवस्था में सुधार संभव है। यदि अन्य अदालतें भी ऐसी दक्षता अपनाएं, तो लंबित मामलों की समस्या काफी हद तक हल हो सकती है। यह घटना न केवल एक रिकॉर्ड है, बल्कि न्यायिक सुधार की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम भी है।
यह त्वरित न्याय की मिसाल जनता के लिए उम्मीद की किरण है और अदालतों की कार्यक्षमता को नई ऊंचाई पर ले जाती है।
