निगरानी के 3000 से अधिक मामले लंबित, एसीएस ने दिए जल्द निष्पादन के निर्देश
मुकेश कुमार-स्टेट हेड- बिहार/झारखंड
पटना(बिहार)।बिहार सरकार के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को गति देने के लिए बुधवार को निगरानी विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविन्द कुमार चौधरी की अध्यक्षता में सभी विभागों के मुख्य निगरानी पदाधिकारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के संवाद कक्ष में हुई इस बैठक में लंबित परिवादों और अभियोजन स्वीकृति के मामलों पर सख्त रुख अपनाया गया।शिक्षा और नगर विकास विभाग में सर्वाधिक मामलेसमीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि निगरानी विभाग द्वारा विभिन्न विभागों को प्रेषित किए गए 3000 से अधिक ऑनलाइन परिवाद फिलहाल लंबित हैं।इनमें सबसे ज्यादा मामले निम्नलिखित विभागों से संबंधित हैं:-शिक्षा,नगर विकास एवं आवास विभाग,
गृह विभाग,राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग,कृषि विभाग।
अपर मुख्य सचिव ने इन विभागों को निर्देश दिया कि जांच प्रतिवेदन तैयार कर लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करें। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन व्यवस्था शुरू होने से ट्रैकिंग बेहतर हुई है, जिससे कार्य में पारदर्शिता आई है।•अभियोजन स्वीकृति के 53 मामले अटके•बैठक में भ्रष्ट अधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई के लिए आवश्यक अभियोजन स्वीकृति की भी समीक्षा की गई।वर्तमान में कुल 53 मामले लंबित पाए गए हैं। इसमें जल संसाधन, संसदीय कार्य,शिक्षा, स्वास्थ्य और सामान्य प्रशासन विभाग की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक पाई गई।एसीएस ने इन मामलों में तेजी लाने और मुख्य निगरानी पदाधिकारियों को हर माह नियमित बैठक करने का निर्देश दिया।•निगरानी ब्यूरो की सक्रियता•पिछले वर्ष 122 कांड दर्ज•
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के महानिदेशक जितेन्द्र सिंह गंगवार ने बैठक में जानकारी दी कि विगत वर्ष कुल 122 कांड दर्ज किए गए।इनमें से 102 मामले ट्रैप (रंगे हाथ गिरफ्तारी)से संबंधित थे।ब्यूरो ने भी मामलों के त्वरित निपटारे के लिए अपना ऑनलाइन पोर्टल शुरू कर दिया है।
इस महत्वपूर्ण बैठक में निगरानी ब्यूरो के डीआईजी नवीन चन्द्र झा,विशेष निगरानी इकाई के डीआईजी विकास कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
