संवाददाता शेख शमीम
जामताड़ा
नियम कानून को ताक पर रखकर किया गया सहायक आचार्य का पदस्थापन को रद्द
जामताड़ा:जामताड़ा जिले में शिक्षा विभाग की ओर से किए गए 234 सहायक आचार्य के पदस्थापन को रद्द कर दिया गया है।इस संबंध डीसी जामताड़ा ने 29 दिसंबर को पत्र जारी कर कहा है कि निदेशक प्राथमिक शिक्षा, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग राँची के पत्रांक 2298 दिनांक 23.12.2025 के आलोक में दिनांक 09 दिसंबर को प्रभारी उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में सम्पन्न जिला शिक्षा स्थापना समिति (सहायक आच आचार्य) की बैठक में किये गये सहायक आचार्य की पदस्थापन को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाता है।इसके साथ ही जिला शिक्षा अधीक्षक ने 26 दिसंबर को एक पत्र जारी कर कहा है कि सभी सहायक आचार्य को आगामी संशोधित पदस्थापन होने तक पूर्व पदस्थापित विद्यालय में तत्काल प्रभाव से प्रतिनियोजित किया जाता है।अधोहस्ताक्षरी कार्यालय के ज्ञापांक-2303, दिनांक-10.12.2025 के द्वारा नवनियुक्त इंटर प्रशिक्षित सहायक आचार्य (कक्षा 1-V) एवं ज्ञापांक-2304 दिनांक-10.12.2025 के द्वारा स्नातक प्रशिक्षित सहायक आचार्य (कक्षा VI-VIII) को विभिन्न विद्यालयों में पदस्थापित किया गया है। उक्त सभी विद्यालय के प्रधानाध्यापक / प्रभारी प्रधानाध्यापक को निदेश दिया जाता है कि नव पदस्थापित सहायक आचार्य को अगले आदेश तक किसी भी प्रकार का विद्यालय प्रभार नहीं देना सुनिश्चित करेंगे।आपको बता दें कि शिक्षा विभाग की ओर से 10 दिसंबर को 1 से 5वीं कक्षा के 109 तथा 6 से 8 वी कक्षा के 125 सहायक आचार्य के पदस्थापन किया गया था। यह पदस्थापना नियम कानून को ताक पर रखकर किया गया था। मिली जानकारी के अनुसार 9 दिसंबर को वर्तमान उपविकास आयुक्त निरंजन कुमार अवकाश पर थे और उनके पद पर दैनिक प्रभार में आईटीडीए परियोजना निदेशक जुगनू मिंज थे,जिन्होंने नियमो के विरुद्ध प्रभारी उप विकास आयुक्त के रूप में अपने अध्यक्षता में जिला शिक्षा स्थापना समिति (सहायक आच आचार्य) की बैठक किया,इसी बैठक की कार्यवाही के आलोक में 10 दिसंबर को जिला शिक्षा अधीक्षक ने पत्र जारी कर सहायक आचार्य की पदस्थापन दिया।डीडीसी की गैरमौजूदगी में आनन फानन में किए गए पदस्थापन शुरू से ही सवालों के घेरे में था।पदस्थापना में मनमानी और भ्रष्टाचार हावी रहने को लेकर जिलेभर में चर्चाओ और अटकलों का बाजार गर्म था।इसी बीच 18 दिसंबर को एसीबी ने शिक्षा विभाग में समग्र शिक्षा अभियान कार्यालय के लिपिक सौरभ कुमार को 6 हजार रुपए घूस लेते गिरफ्तार किया था।अब फिर झारखंड के प्राथमिक शिक्षा निदेशक की ओर से संज्ञान लेकर की गई इस बड़ी कार्रवाई और पदस्थापना रद्द करने से इन चर्चाओं और आरोपों को और बल मिलने लगा है।स्थानीय लोग सहायक आचार्य के पदस्थापन ने बरती गई अनियमितता और भ्रष्टाचार की जांच ईडी, सीबीआई या एसीबी से कराए जाने की मांग कर रहे हैं।ताकि इसकी पूरी सच्चाई सामने आए और बच्चों को उनके शिक्षा के अधिकार में भ्रष्टाचार बाधक न बने तथा शिक्षा विभाग भ्रष्टाचार से मुक्त हो।