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जामताड़ा: संवाद संस्था ने एग्रोइकोलॉजी प्रणाली के तहत फतेहपुर प्रखंड में 55 किसानों के बीच गेहूं व आलू बीज का किया वितरण

 लोकेशन जामताड़ा

संवाददाता शेख शमीम


संवाद संस्था ने एग्रोइकोलॉजी प्रणाली के तहत फतेहपुर प्रखंड में 55 किसानों के बीच गेहूं व आलू बीज का किया वितरण

खबर जामताड़ा जिले से है जहाँ फतेहपुर प्रखंड में संवाद संस्था की ओर से एग्रोइकोलॉजी प्रणाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गरीब छोटे एवं वंचित किसानों के बीच गेहूं एवं आलू बीज का वितरण किया गया। इस कार्यक्रम के अंतर्गत फतेहपुर प्रखंड के कुल 55 किसानों को गेहूं और आलू का बीज उपलब्ध कराया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक टिकाऊ और कम लागत वाली खेती को प्रोत्साहित करना है ताकि किसान रासायनिक खेती पर निर्भर हुए बिना अपनी खेती को मजबूत बना सकें और उनकी आजीविका में सुधार हो सके। संवाद संस्था का मानना है कि एग्रोइकोलॉजी आधारित खेती से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है पर्यावरण सुरक्षित रहता है और किसानों की खेती लागत में भी कमी आती है। बीज वितरण के दौरान किसानों को एग्रोइकोलॉजी प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी गई जिसमें मिट्टी की सेहत सुधारने के तरीके जैविक खाद का उपयोग फसल चक्र अपनाने रासायनिक खाद व कीटनाशकों के दुष्प्रभाव तथा स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग पर चर्चा की गई। किसानों को बताया गया कि इस पद्धति से खेती करने पर फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है और लंबे समय में खेती अधिक लाभकारी सिद्ध होती है। बीज प्राप्त करने वाले किसानों में सोलेन चेतन सुभाष रामचरण सहित अन्य किसान शामिल थे। किसानों ने संवाद संस्था की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि समय पर बीज और सही जानकारी मिलने से खेती करने में उन्हें काफी सहायता मिलेगी। कार्यक्रम को सफल बनाने में संवाद संस्था की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मौके पर सुशीला प्रियंका राखी पूर्णिमा सुमित्रा इमरान जाफर रितिका एवं अफजल सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे जिन्होंने किसानों के साथ सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं भी सुनीं। संवाद संस्था ने बताया कि आने वाले समय में भी एग्रोइकोलॉजी प्रणाली के माध्यम से किसानों और महिलाओं की आजीविका को मजबूत करने के लिए इस तरह के कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे ताकि क्षेत्र में टिकाऊ और आत्मनिर्भर खेती को बढ़ावा मिल सके।

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