ब्यूरोचीफ, शैलेन्द्रसिंह बारडोली गुजरात
मध्यप्रदेश के धन कुबेर सौरभ शर्मा काली कमाई की सफेद असलियत : इस मामले मे ओर कई राजकीय नेताओ ED की रडार पर।
मामूली शुरुआत और गलत तरीके से कमाया पैसा: सौरभ शर्मा के पिता एक सरकारी डॉक्टर थे। उनकी मौत के बाद, सौरभ 2015 में अनुकंपा के आधार पर ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट में कांस्टेबल के तौर पर शामिल हुए। हालांकि, बाद में वह जबरन वसूली और ट्रांसपोर्ट चेकपॉइंट के गैर-कानूनी कामकाज में शामिल हो गए और 2023 में VRS (वॉलंटरी रिटायरमेंट) ले लिया।छापे में चौंकाने वाले खुलासे: जब लोकायुक्त और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (IT) ने उनके और भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में उनके करीबी लोगों के ठिकानों पर छापा मारा, तो भारी मात्रा में दौलत मिली। भोपाल के बाहर खड़ी एक लावारिस कार में ₹11 करोड़ कैश और 52 kg सोना मिला। इसके अलावा, उनके पास से होटल, स्कूल, लग्जरी गाड़ियों और करोड़ों की बेनामी प्रॉपर्टी के डॉक्यूमेंट्स बरामद हुए।
ज़मानत और जांच: लंबे समय तक फरार रहने के बाद, उन्हें लोकायुक्त पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। लेकिन, जांच एजेंसियों (खासकर एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED)) की रिपोर्ट बताती है कि सौरभ शर्मा को लोकायुक्त द्वारा तय समय में चार्जशीट फाइल न करने की वजह से अप्रैल में डिफ़ॉल्ट बेल मिल गई थी।
नौकरी में धोखाधड़ी: बाद में, ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की एक शिकायत के आधार पर, सौरभ और उसकी मां के खिलाफ धोखाधड़ी का एक और केस दर्ज किया गया। आरोप यह था कि नौकरी पाने के लिए, उसने एक एफिडेविट में गलत जानकारी दी थी कि परिवार में किसी और के पास सरकारी नौकरी नहीं है, जबकि उसके बड़े भाई के पास थी।
