ब्यूरो चीफ शैलेन्द्रसिंह बारडोली गुजरात
गृहराज्यमंत्रीजी, क्या पुलिसके आशीर्वाद बिना शराबकी अवैध बिक्री करनेवाली बात संभव हैं?जो सीधे तौर पर आपके शराबबंदी संबंधी बयानों को चुनौती दे रहे हैं?
सुरत जिले मांगरोल तालुकाके झखवाव गांवमें शराबबंदी का उल्लंघन करनेवाले जीआरडी जवानों को बर्खास्त किया गया।
कौन कहता है कि जिले में शराब नहीं मिलती? सूरत जिले में तो शराबबंदी के नामपर किश्तें वसूलने वाले भी सुबहसे सड़कोंपर घूम रहे हैं। सख्त पाबंदी का सबूत किताब में है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के बाद पुलिसकर्मी की नाक कटजाने वाली बात बनगई।वीडियो वायरल होते ही, अधिकारी ने अपनी चमड़ीको बचाने के लिए तुरंत जांच शुरू करदी और दोनों जीआरडी को ड्यूटीसे हटादिया।
दरअसल, इस बातसे इनकार नहीं करसकते कि सूरत जिलेमें शराबके खिलाफ कार्रवाई नहीं होनेकि वजह पुलिसके खुले चतुर्भुज आशीर्वाद केबिना असंभव है।
हालांकि बारदोली तालुका के मोताबिट चौकी क्षेत्रोंके सभी गांवोंमें शराब उपलब्ध है, लेकिन जमादार प्रवीण सिंह को केवल कर संग्रहकर्ता क्लर्क से शराब प्राप्त करके अपनी जेब भरने में ही दिलचस्पी है, इसलिए अवैध शराब बेचने वाले बेरोकटोक सक्रिय हैं।
मोताबिट में, जिला पुलिस प्रमुखने स्वयं तालुकाकी इस चौकीपर छापेमारीमें रुचि दिखानी आवश्यकता। जमादार का कर्तव्य क्या है? और जब एसपी के लिए यह अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है कि खाकी वर्दी पर कौन दाग लगाता है, इसके बारेमे जरूरी जांच की जायतो ऐसे कर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच अपरिहार्य साबित हो जाती है।
