लोकेशन बिहार। से नेशनल ब्यूरो हेड एवं लीगल एडवाइजर अधिवक्ता राजेश कुमार की विशेष रिपोर्ट के कलम से केवल TTN 24 National News chanal
एंकर। बेगूसराय में न्याय की एक मिसाल: दिवाली की 'खूनी रात' के मुख्य दोषी को फांसी की सजा
बिहार के बेगूसराय जिले में 12 फरवरी 2026 को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया गया, जिसने पूरे प्रदेश में न्याय की गूंज पैदा की है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय (एडीजे-3) ब्रजेश कुमार सिंह की अदालत ने 2019 की दिवाली की रात हुए तिहरे हत्याकांड (ट्रिपल मर्डर) के मुख्य आरोपी विकास कुमार उर्फ विकास सिंह को मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई। यह फैसला इसलिए खास है क्योंकि बेगूसराय जिले के न्यायिक इतिहास में पहली बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से फांसी की सजा का ऐलान किया गया। दोषी विकास सिंह पटना की बेउर जेल में बंद है, जहां से उसे VC के जरिए कोर्ट में पेश किया गया।घटना की पृष्ठभूमि: खुशियों का त्योहार 'खून की होली' में बदल गया
27 अक्टूबर 2019 की दिवाली की रात, सिंघौल थाना क्षेत्र के मचहा गांव में विकास सिंह ने अपने ही परिवार पर हमला किया। उसने गोली मारकर:
अपने सगे भाई कुणाल सिंह,
भाभी कंचन देवी,
और 17 वर्षीय भतीजी सोनम कुमारी की बेरहमी से हत्या कर दी।
विकास ने भतीजे शिवम पर भी गोली चलाने की कोशिश की, लेकिन पिस्तौल मिसफायर हो गई। शिवम इस मामले का प्रमुख चश्मदीद गवाह बना, जिसकी गवाही ने आरोपी को फांसी तक पहुंचाया। यह वारदात जमीन-जायदाद विवाद से जुड़ी थी, जहां विकास सिंह गवाहों को खत्म करने की साजिश रच रहा था।
सीरियल किलर की मानसिकता: परिवार के 5 सदस्यों की हत्या
अदालत में साबित हुआ कि विकास सिंह एक क्रूर अपराधी था, जो संपत्ति हड़पने के लिए परिवार के सदस्यों को मार रहा था:
2012: चाचा अरुण सिंह की हत्या (चार बीघा जमीन के विवाद में; इस मामले में वह पहले से उम्रकैद की सजा काट रहा है)।
2017: चाची मुन्नी देवी की हत्या (मामला अदालत में लंबित)।
2019: भाई कुणाल की हत्या, क्योंकि कुणाल पिछले मामलों में मुख्य गवाह थे और दबाव में नहीं आए।
अदालत ने इसे "रेयर ऑफ द रेयरेस्ट" (दुर्लभतम अपराध) करार दिया और "हिनियस क्राइम" (जघन्य अपराध) बताया। अभियोजन पक्ष की ओर से एपीपी राम प्रकाश यादव ने मजबूत पैरवी की।
डिजिटल युग में न्याय की नई मिसाल
जज ब्रजेश कुमार सिंह ने सुरक्षा और तकनीकी आधुनिकता को ध्यान में रखते हुए VC के जरिए फैसला सुनाया। यह बेगूसराय जिले में पहली ऐसी घटना है। दो अन्य आरोपियों रामनिवास यादव और सरिता देवी को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया गया।
पीड़ित परिवार की प्रतिक्रिया
पीड़ित परिवार के सदस्यों ने कहा कि वर्षों के इंतजार के बाद "कलेजे को ठंडक मिली"। यह फैसला न केवल न्याय दिलाया, बल्कि समाज को संदेश दिया कि क्रूर अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा।
यह फैसला बिहार में न्याय व्यवस्था की मजबूती और तकनीक के इस्तेमाल का प्रतीक बन गया है। विकास सिंह के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की संभावना है, लेकिन फिलहाल यह न्याय की जीत है।
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