अस्तुरा से हमला और दांत काटने वाले को 5 साल की सजा: बोकारो न्यायालय का सख्त फैसला
(नेशनल ब्यूरो हेड एवं लीगल एडवाइजर अधिवक्ता राजेश कुमार की विशेष रिपोर्ट)
बोकारो जिले के व्यवहार न्यायालय ने एक गंभीर आपराधिक मामले में सख्त रुख अपनाते हुए अभियुक्त को पांच वर्ष का सश्रम कारावास और 5,000 रुपये का जुर्माना सुनाया है। यह मामला जानलेवा हमले, हथियार (अस्तुरा) से हमला करने के प्रयास और पीड़ित के दांत काटकर गंभीर चोट पहुंचाने से जुड़ा है।घटना का विवरण
घटना की तारीख: 26 सितंबर 2024
स्थान: बोकारो जिला, बालीडीह थाना क्षेत्र, बियाडा बाजार (पेट्रोल पंप परिसर स्थित बाबा मोटर्स के पास)
शिकायतकर्ता रुपेश कुमार पांडेय मोटरसाइकिल से जा रहे थे। दोपहर करीब 3:30 बजे वे चाय पीने के लिए चाय दुकान के पास रुके। जैसे ही वे वहां पहुंचे, अभियुक्त जसबीर कुमार उर्फ कल्लू ने अचानक पैर से लात मारकर उन्हें जमीन पर गिरा दिया। इसके बाद उसने अस्तुरा (एक प्रकार का धारदार हथियार) से जानलेवा हमला करने का प्रयास किया।
पीड़ित ने किसी तरह हमला रोक लिया, लेकिन बचाव के दौरान अभियुक्त ने रुपेश के हाथ में दांत काटकर गंभीर चोट पहुंचाई। अभियुक्त ने पीड़ित का पर्स छीनने की भी कोशिश की।
शोर-शराबा सुनकर आसपास के लोगों ने तुरंत हस्तक्षेप किया और अभियुक्त को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।
न्यायिक प्रक्रिया और फैसला
मामले की सुनवाई प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री अनिल कुमार मिश्रा की अदालत में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से एपीपी रविशंकर चौधरी ने पैरवी की।
अभियोजन पक्ष ने कुल 8 गवाह पेश किए, जिनमें चिकित्सक (मेडिकल साक्ष्य के लिए) और जांच अधिकारी भी शामिल थे।
मेडिकल रिपोर्ट, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने अभियुक्त जसबीर कुमार उर्फ कल्लू को दोषी करार दिया।
सोमवार को अदालत ने सजा सुनाते हुए 5 वर्ष का सश्रम कारावास और 5,000 रुपये जुर्माना लगाया।
पीड़ित पक्ष की प्रतिक्रिया
फैसले के बाद पीड़ित पक्ष ने न्याय व्यवस्था पर भरोसा जताते हुए संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के खतरनाक अपराधियों को कड़ी सजा मिलने से समाज में डर का माहौल बनेगा और लोग सुरक्षित महसूस करेंगे।
कानूनी नजरिया
यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की उन धाराओं के अंतर्गत आता है जो:
जान से मारने के प्रयास,
हथियार से हमला,
स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाना,
लूट/छीनाझपटी के प्रयास
से संबंधित हैं। अदालत ने साक्ष्यों को मजबूत मानते हुए अधिकतम संभव सजा का प्रावधान लागू किया।
निष्कर्ष
बोकारो की इस अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सार्वजनिक स्थानों पर अकारण हिंसा और जानलेवा हमले को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। समाज में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए न्यायपालिका का यह सख्त रवैया सराहनीय है।
अधिवक्ता राजेश कुमार
नेशनल ब्यूरो हेड एवं लीगल एडवाइजर
(विशेष रिपोर्ट – बोकारो व्यवहार न्यायालय)
