ब्यूरोचीफ शैलेन्द्रसिंह बारडोली गुजरात
सुरत जिले के मांडवी तालुका में आया अमलसादी गांव में विकास के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए गए: कागजों पर सड़कें बनाई गईं, लेकिन जमीन पर उनका कोई नामोनिशान नहीं।आरटीआई में पेवर ब्लॉक और सड़क निर्माण घोटाले का खुलासा, बिना काम किए लाखों रुपये का भुगतान, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का सवाल।
जवाबदेही की मांग करने वाले एक आरटीआई कार्यकर्ता पर भी जानलेवा हमला किया गया था, क्या तलाती का तबादला जिम्मेदारी की पूर्ति है या भ्रष्टाचार के लिए एक राजनीतिक आवरण?।
सूरत जिले के मांडवी तालुका के अमलसादी गांव में ग्राम विकास के नाम पर हुए खर्च को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। 15वें वित्त आयोग के तहत वर्ष 2023-24 में गांव के बुनियादी विकास के लिए 17,94,740 लाख रुपये का अनुदान आवंटित किया गया था।लेकिन आरटीआई कार्यकर्ता विजय भाई छोटू भाई पटेल द्वारा प्राप्त दस्तावेजों से विकास की नहीं, बल्कि अनियमितताओं की तस्वीर सामने आई है।
दस्तावेजों के अनुसार, गांव के कोली पटेल फलिया में पेवर ब्लॉक बिछाने का काम 4,78,875 रुपये की लागत से स्वीकृत किया गया था।
ऐसा ही हुआ। किताब में दर्ज है कि काम पूरा हो गया था और पैसा भी दे दिया गया था, लेकिन जब साइट का निरीक्षण किया गया तो वहां एक भी पेवर ब्लॉक नहीं मिला, जिससे पूरा मामला संदेह पैदा हो गया।
इस स्थिति ने सवाल खड़ा कर दिया है कि विकास के लिए मिली अनुदान राशि का उपयोग किया गया या लेकिन कहा पर विकाश कार्य हुआ?
विकास का नाटक सिर्फ कागजों पर ही रचा गया? इस मामले में कहा जा रहा है कि तत्कालीन तलाटी अंकुर सावलिया का तबादला हो गया है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर कोई अनियमितता हुई है तो पैसा कौन वसूलेगा ओर किसके पास? फिलहाल वे कदोद-वधवानिया ग्राम पंचायत में हैं।
कहा जा रहा है कि वे अपना कर्तव्य निभा रहे हैं। ग्रामीणों के बीच इस बात पर तीखी बहस चल रही है कि इस तबादले को कार्रवाई का एक रूप माना जाए या जिम्मेदारी से बचने का एक तरीका।उर्वी गामित वर्तमान में तलाटी के पद पर कार्यरत हैं, लेकिन गांव में यह चर्चा चल रही है कि चूंकि मौजूदा सरपंच पूर्व मंत्री के करीबी माने जाते हैं, इसलिए इस पूरे मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर वलोड तालुका में ऐसे मामलों में तलाटी निलंबित किए जा सकते हैं, तो अमलसादी में चुप्पी क्यों है? क्या नियम क्षेत्र के अनुसार बदलते हैं या भ्रष्टाचार को राजनीतिक संरक्षण दिया जा रहा है? यह पूरा मामला की बात यहीं खत्म नहीं होती।
ग्रामीणों के अनुसार, विधायक के अनुदान से बनी सीसी सड़क पटेल फलिया में वर्षों से मौजूद होने के बावजूद, 3,92,100 रुपये की लागत से एक नई सड़क दिखाई गई। इसके साथ ही, यह भी आरोप है कि पेवर ब्लॉक के नाम पर 3,4,08,875 रुपये का गबन हुआ।
उस समय ग्राम सभा के दौरान गांव में भारी हंगामा हुआ और यह गंभीर आरोप है कि हिसाब मांगने वाले आरटीआई कार्यकर्ता विजय पटेल पर जानलेवा हमला भी किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच हितेश दलसिंह चौधरी और उनके साथियों का इस हमले में हाथ था।
यदि इन आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो इसे न केवल वित्तीय भ्रष्टाचार बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया और पारदर्शिता को दबाने का प्रयास भी माना जाएगा।
जवाबदेही की मांग करने वालों पर हमला और दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं: पंचायत की विश्वसनीयता पर कई सवालों?!
