*रिपोर्ट भरतसिंह आर ठाकोर अरवल्ली गुजरात*
*अरावली जिले के सबलपुर की नंदिनी सखी मंडल को पश्चिम से सर्वश्रेष्ठ बनाने में सफलता...*
*पश्चिम की सर्वश्रेष्ठ जादुई कला...नंदिनी सखी मंडल की शक्तिशाली बहनें*
गुजरात के अरावली जिले के एक छोटे से गांव सबलपुर में स्थित नंदिनी सखी मंडल महिला सशक्तिकरण का एक ज्वलंत उदाहरण बन रहा है। इस मंडली की दस बहनें अपनी कलात्मकता और मेहनत से घर में पड़े पुराने बेकार कपड़ों से आकर्षक और रंग-बिरंगे कालीन बना रही हैं। "कचरे से सर्वोत्तम" के सिद्धांत पर चलते हुए ये बहनें पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी बन रही हैं। इन गलीचों को बनाने की प्रक्रिया बहुत सरल लेकिन कुशल है। लोग अपने घरों में इधर-उधर पड़े पुराने कपड़ों को इकट्ठा करते हैं और उन्हें अलग-अलग रंगों के टुकड़ों में काटकर सुंदर डिजाइन वाले गलीचे बनाते हैं। इन गलीचों में प्रयुक्त रंगों और कलात्मकता का संयोजन इन्हें एक अनोखा आकर्षण प्रदान करता है। बाजार में ऐसे हस्तशिल्प की मांग बढ़ रही है, जिससे ये बहनें अच्छी कमाई कर रही हैं और अपने परिवार का जीवन स्तर ऊंचा उठा रही हैं।इस सफलता के पीछे गुजरात सरकार की सखी मंडल योजना का बहुत बड़ा योगदान है। इस योजना के तहत महिलाओं को स्वयं सहायता समूह बनाने के लिए वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। गुजरात सरकार की कई महिला केंद्रित योजनाओं ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है। इसका जीता जागता उदाहरण हैं नंदिनी सखी मंडल की ये बहनें, जिन्होंने अपनी कला के माध्यम से आय के साधन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दिया है।
