गोंडाहुर धान खरीदी केंद्र बना 'भ्रष्टाचार का अड्डा', किसानों की मेहनत पर डाका डाल रहा केंद्र प्रभारी।
पत्रकार स्वतंत्र नामदेव
कांकेर जिला ब्यूरो
प्रदेश की सरकार जहाँ एक-एक दाना धान खरीदने और किसानों को समृद्ध बनाने का दावा कर रही है, वहीं गोंडाहुर धान खरीदी केंद्र से लूट और धांधली की शर्मनाक तस्वीरें सामने आ रही हैं। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित गोंडाहुर में किसानों का पसीना सूखने से पहले ही उनके हक की कमाई पर डाका डाला जा रहा है। 'सूक्ति' और 'नमी' के नाम पर यहाँ जो खेल चल रहा है, उसने प्रशासन की शुचिता पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं।*मशीनों में 'हेराफेरी' और 3.5 किलो की अवैध कटौती*
किसान रोशन बाछाड़ और सूरज बाछाड़ सहित दर्जनों ग्रामीणों ने केंद्र प्रभारी अश्विनी मण्डल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि केंद्र में जानबूझकर खराब और दोषपूर्ण नमी मापक यंत्र का उपयोग किया जा रहा है। नमी ज्यादा दिखाकर किसानों को डराया जाता है कि उनका धान रिजेक्ट कर दिया जाएगा।
किसानों के अनुसार वे घर से पुराना वारदाना में धान तौलकर केंद्र में लाते है केंद्र प्रभारी द्वारा एक से दो बोरी तौलकर किसानों को वारदाना के बदले वारदाना दे दिया जाता है।
धान पास करने के बदले प्रति क्विंटल 2.5 से 3.5 किलो अतिरिक्त धान जबरन लिया जा रहा है। किसानों का धान प्रति बोरा 41.8किलो की तौल को मुंशी द्वारा 39 किलो का पर्ची बनाकर ऑपरेटर तक पहुंचाया जाता है।ग्रामीणों ने बताया कि कर्मचारी उन्हें धमकाते हैं कि "अगर अतिरिक्त धान नहीं दिया तो धान वापस ले जाओ।"
*हमाली के नाम पर ₹6 की 'गुंडा टैक्स' वसूली*
धान खरीदी का संपूर्ण खर्च शासन द्वारा वहन किया जाता है, लेकिन गोंडाहुर में कानून को ताक पर रखकर किसानों से प्रति बोरी ₹6 की नकद वसूली की जा रही है। घर से तौलकर धान लाने के बावजूद किसानों को इस अवैध 'हमाली शुल्क' की मार झेलनी पड़ रही है
*जनप्रतिनिधि की चेतावनी: "कार्रवाई नहीं हुई तो मुख्यमंत्री तक जाएगी गुहार"*
इस मामले में जनपद सदस्य हरिमोहन दास ने प्रशासन के ढुलमुल रवैये पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने बताया कि केंद्र में महिलाओं से दुर्व्यवहार एवं केंद्र प्रभारी अश्विनी मण्डल की मनमानी की लिखित शिकायत तहसीलदार और एसडीएम पखांजूर से पूर्व में कई बार की जा चुकी है, लेकिन अधिकारियों का जवाब केवल "जांच होगी" तक सीमित है।
"प्रशासन की चुप्पी यह संकेत देती है कि भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं। यदि जिला प्रशासन और कलेक्टर कांकेर ने तुरंत कड़े कदम नहीं उठाए, तो मैं स्वयं किसानों के साथ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के पास जाकर इस अन्याय की शिकायत करूँगा।"
— हरिमोहन दास, जनपद सदस्य।
*प्रशासन की चुप्पी पर उठते सवाल*
आखिर किसके संरक्षण में केंद्र प्रभारी अश्विनी मण्डल नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं? क्या उच्च अधिकारियों को किसानों की इस लूट की खबर नहीं है, या जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं?
गोंडाहुर के किसानों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उनकी मांग स्पष्ट है:
तत्काल प्रभाव से खराब नमी यंत्र बदले जाएं।
अवैध वसूली करने वाले प्रबंधक और कर्मचारियों पर शिकायत दर्ज हो।
किसानों से लूटे गए धान और पैसों की भरपाई की जाए।
