परतापुर नदी घाट पर बेखौफ रेत तस्करी शासन-प्रशासन 'मौन' सहमति पर उठे सवाल।
पत्रकार स्वतंत्र नामदेव
कांकेर जिला ब्यूरो
क्षेत्र के परतापुर नदी घाट से इन दिनों रेत का अवैध कारोबार चरम पर है। स्थिति यह है कि रोजाना सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रालियां बिना किसी रॉयल्टी और वैधानिक अनुमति के रेत की तस्करी कर रहे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह सब कुछ खुलेआम प्रशासन की आंखों के सामने हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं।स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, सुबह होते ही नदी घाट पर ट्रैक्टरों का तांता लग जाता है। बिना किसी डर के रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है और उसे ऊंचे दामों पर बाजार में बेचा जा रहा है। जब ट्रैक्टर चालक से इस विषय में बात की गई तो उन्होंने नाम न छापने के शर्त पर बताया परतापुर रेती घाट पर रॉयल्टी के नाम से प्रति ट्रैक्टर ट्राली ₹300 नगद राशि जमा करते हैं जो वहां बैठे मुंशी द्वारा रजिस्टर्ड में लिखा जाता है और हमें कहां जाता है कि यह संपूर्ण पैसा शासन के खाते में जमा होगा।
परंतु यह सारा पैसा शासन के खाते में ना पहुंच कर निजी रसूखदारों के पास में जाता है।
शासन को मिलने वाली रॉयल्टी की सरेआम चोरी हो रही है, जिससे खनिज विभाग को प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है।
*प्रशासन की चुप्पी ने खड़े किए गंभीर सवाल*
नदी घाट से रेत निकासी का यह खेल नया नहीं सालों पुराना है, वर्तमान में इसकी गति ने कई संदेह पैदा कर दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि प्रशासन की इस "मौन" कार्यप्रणाली से ऐसा प्रतीत होता है कि कहीं न कहीं इस अवैध कारोबार को ऊंचे स्तर पर संरक्षण प्राप्त है।
"सब कुछ आंखों के सामने होते हुए भी कार्रवाई न होना, प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाता है। ऐसा लगता है कि विभाग खुद ही सरकारी संपदा को हानि पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहा है।" -
अवैध और अनियंत्रित खनन से नदी का जलस्तर नीचे जा रहा है और किनारों के कटने का खतरा बढ़ गया है। यदि जल्द ही इस पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो आने वाले समय में क्षेत्र को गंभीर जल संकट और पर्यावरणीय आपदा का सामना करना पड़ सकता है।
परतापुर नदी घाट पर हो रही यह लूट अब चर्चा का विषय बन चुकी है। क्या प्रशासन और खनिज विभाग अपनी नींद तोड़कर इन रेत माफियाओं पर नकेल कसेंगे या फिर सरकारी खजाने को यूं ही लूटा जाता देखते रहेंगे?
इस संबंध में एसडीएम पखांजूर टीआर देवांगन से बात करने पर उन्होंने बताया परतापुर नदी घाट का लीज नहीं हुआ है, रेत का उत्खनन तो अवैध ही माना जाएगा, अभी तक मेरे पास प्रति ट्रैक्टर ट्राली ₹300 अवैध वसूली की शिकायत नहीं आई है यदि कोई ग्रामीण लिखित शिकायत करता है तो हम अवश्य उस पर कार्यवाही करेंगे।
